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शंकराचार्य को मिलीं अतिरिक्त सुविधाएं निरस्त

Sun, 10 Apr 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 10 Apr 2016 02:17 AM IST
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Shankaracharya additional facilities were canceled
अर्धकुंभ स्नान - फोटो : self
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को इस बार माघ मेले में मिलीं अतिरिक्त सुविधाएं निरस्त कर दी गई हैं। प्रशासन ने यह फैसला ऑडिट आपत्ति से बचने के लिए किया है। पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जब मेले के दौरान आवंटित सुविधाएं मेला पूरा होने के बाद निरस्त की गईं। निरस्तीकरण के इस आदेश से तकरीबन 410 संस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। इनमें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को मिलीं अतिरिक्त सुविधाएं भी शामिल हैं।
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प्रशासन ने इस बार माघ मेले में रेवड़ी की तरह करोड़ों की सुविधाएं बांट दीं। तकरीबन 410 नई संस्थाओं को सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। साथ ही इनमें से कई संस्थाओं को इस मेले में पहली बार जमीन भी आवंटित हुई। उच्चाधिकारियों और सत्ता पक्ष के दबाव में प्रशासन को करोड़ों की अतिरिक्त सुविधाएं आवंटित करनी पड़ीं। सुविधाएं और जमीन आवंटित तो कर दी गईं, लेकिन अफसरों को यह आशंका सताती रही कि सीएजी का ऑडिट हुआ तो जवाब देना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि 410 नई संस्थाओं को सुविधाएं आवंटित करने से प्रशासन पर वित्तीय भार बढ़ गया था और अगले मेले में भी इन संस्थाओं को सुविधाएं आवंटित करनी पड़ती। मेला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक ऑडिट में इन तमाम मुद्दों पर आपत्तियां न लगें, सो प्रशासन ने इस बार मेले में दी गईं अतिरिक्त सुविधाएं और 410 नई संस्थाओं को सुविधाओं एवं जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया है।
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इसमें शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, माधवदास, स्वामी विमल देव आश्रम की संस्थाओं को मिलीं अतिरिक्त सुविधाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा खाक चौक के दर्जन भर संतों को मिलीं अतिरिक्त सुविधाएं निरस्त हुई हैं। इन सभी संस्थाओं को अगले साल माघ मेले में अब अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिलेंगी। अगर निरस्तीकरण का आदेश जारी नहीं होता तो संस्थाओं को अगले साल भी यही सुविधाएं मिलतीं। जिन नई संस्थाओं को जमीन आवंटित हुई थी, उन्हें भी अगले मेले में बिना आवेदन जमीन मिल जाती लेकिन अब इन संस्थाओं को भी अगले मेले में जमीन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ेगी। सूत्रों का कहना है कि ऑडिट आपत्ति से बचने के लिए निरस्तीकरण की यह प्रक्रिया पहले भी दो बार हो चुकी है। पूर्व डीएम आशीष गोयल और राजशेखर भी इस तरह का आदेश जारी कर चुके हैं।
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