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सात दिन बाद भी खौफ का साया
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 17 Mar 2015 11:50 PM IST
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कचहरी में वकील की हत्या के बाद हुए बवाल को सात दिन हो गए लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। वकीलों का आंदोलन जिला अदालत के सामने की सड़क तक ही सीमित होकर रह गया है लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है। कचहरी तक जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस का पहरा रहा तो तानव के चलते कई दुकानें भी बंद रहीं। कचहरी के आसपास की दुकानें शाम को वकीलों की सभा समाप्त होने के बाद ही खुलीं।
कचहरी जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस की बैरीकेडिंग थी। सिर्फ दो पहिया वाहनों को ही कलेक्ट्रेट तक जाने की अनुमति दी गई थी। चार पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। कचहरी के सामने तो आरएएफ का पहरा था लेकिन आसपास की सड़कों पर पुलिस तैनात थी। एसपी सिटी राजेश यादव, सीओ चतुर्थ वीरेंद्र कुमार, सीओ पंचम अलका भटनागर, सीओ सिविल लाइंस सचिंद्र पटेल समेत कई थानों की फोर्स एसएसपी दफ्तर पर मौजूद थी। अफसर भीतर से ही सीसीटीवी कैमरों से सभास्थल पर नजर रखे हुए थे। एसएसपी दफ्तर के पीछे के गेट पर भी आरएएफ के जवान तैनात थे।
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कचहरी जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस की बैरीकेडिंग थी। सिर्फ दो पहिया वाहनों को ही कलेक्ट्रेट तक जाने की अनुमति दी गई थी। चार पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। कचहरी के सामने तो आरएएफ का पहरा था लेकिन आसपास की सड़कों पर पुलिस तैनात थी। एसपी सिटी राजेश यादव, सीओ चतुर्थ वीरेंद्र कुमार, सीओ पंचम अलका भटनागर, सीओ सिविल लाइंस सचिंद्र पटेल समेत कई थानों की फोर्स एसएसपी दफ्तर पर मौजूद थी। अफसर भीतर से ही सीसीटीवी कैमरों से सभास्थल पर नजर रखे हुए थे। एसएसपी दफ्तर के पीछे के गेट पर भी आरएएफ के जवान तैनात थे।
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