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वासंतिक नवरात्रः ब्रह्मचारिणी की आराधना, बंद मंदिर में फूलों से शृंगार

Thu, 26 Mar 2020 11:21 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Thu, 26 Mar 2020 11:21 PM IST
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second day of navratra people worshiped the goddess brahamcharini
prayagraj news - फोटो : prayagraj

ब्रह्मचारयितुम् शीलम् यस्या सा ब्रह्मचारिणीम/ सच्चिदानंद सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते। वासंतिक नवरात्रि के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को सनातनधर्मी परिवारों में घर-घर मां दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी देवी की इन्हीं मंत्रों से सविधि आराधना की गई। इस दौरान दुर्गासप्तशती के पाठ के अलावा दुर्गा कवच की भी स्तुति की गई। मंदिरों में सिर्फ पुजारियों ने ही प्रवेश किया। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं को सेवादारों ने बाहर से ही वापस कर दिया।



वासंतिक नवरात्रि के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को मीरापुर स्थित शक्तिपीठ मां ललिता देवी का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में रंग-बिरंगे फूलों से पुजारियों ने शृंगार किया। मां तो तरह-तरह के आभूषण भी सजाए गए। इस दिन मंदिर प्रबंधन समिति के पदाधिकारी भी भीतर प्रवेश नहीं कर सके। मंदिर पुजारी पं शिव मूरत मिश्रा के मुताबिक दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप उस देवी का है, जिन्होंने भगवान शिव को अपने स्वामी स्वरूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी तपस्या के कारण ही उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा है।

second day of navratra people worshiped the goddess brahamcharini
prayagraj news - फोटो : prayagraj
इस दिन मां की ब्रह्मचारिणी स्वरूप में सजाई गई झांकी में श्वेत पुष्पों का अधिक इस्तेमाल किया गया। इसी तरह मां कल्याणी देवी का भी ब्रह्मचारिणी रूप में पुजारियों ने गर्भगृह में शृंगार किया। इसी तरह घरों में अक्षत, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प अर्पित कर व्रतियों ने कपूर और गाय के घी से दीपक जलाकर मां ब्रह्मचारिणी की आरती की। मां ब्रह्मचारिणी को श्वेत पुष्प प्रिय होने की वजह से चमेली और सफेद कनैल अर्पित किया गया।

मीरापुर स्थित ललिता देवी मंदिर में बृहस्पतिवार को प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी भी प्रवेश नहीं कर सके। प्रशासन ने बुधवार की रात को ही मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों को इस बावत हिदायत दे दी थी। ललिता मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा ने बताया कि मंदिर में पुजारियों के अलावा किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं है। घरों से ही मां का ध्यान करने के लिए श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है।
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