देश में बढ़ रहे कोराना संक्रमण के बढ़ते मरीजों को देखते हुए उत्तर मध्य रेलवे ने अपनी यार्ड में खड़ी ट्रेनों के कोच को आइसोलेशन वार्ड के रूप में तब्दील करने की तैयारी की है। ताकि आपातकालीन स्थिति में अगर आइसोलेशन वार्ड की जरूरत पड़े तो इन कोचों का इस्तेमाल किया जा सके।
पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में एनसीआर महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के दिल्ली डिपो मेडिकल विभाग के परामर्श के अनुरूप एक कोच ट्रायल के रूप में तैयार करने को कहा है। दरअसल, एनसीआर महाप्रबंधक के पास उत्तर रेलवे महाप्रबंधक का भी चार्ज है।
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एसएन में आइसोलेशन कक्ष
- फोटो : अमर उजाला
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों को देखते हुए किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का सामना करने के लिए तैयारी के क्रम में रेल डिब्बों को संशोधित करते हुए आईसोलेशन वार्ड के रूप में उपयोग करने की संभावना पर पिछले तीन चार दिन से विचार चल रहा है। उसी को अब मूर्त रूप दिया जाएगा।
इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने भी इसी सप्ताह आइसोलेशन बेड की संखया बढ़ाने के लिए प्रयागराज समेत सभी मंडलों को निर्देश दिया है। इसके अलावा आईआरसीटीसी से भी कहा गया है कि अगर कोच में आइसोलेशन वार्ड बनते हैं तो भोजन की व्यवस्था के लिए वह योजना तैयार रखे।
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train
- फोटो : अमर उजाला।
बताया जा रहा है कि आइसोलेशन वार्ड के लिए रेलवे अपने एसी कोच का इस्तेमाल कर सकती है। वहीं दूसरी ओर एनसीआर प्रशासन ने वेंटिलेटर आदि के लिए अपने पैरामेडिकल कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध वीडियो का उपयोग प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा है। एनसीआर के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
सेफटी कैटेगरी और रनिंग स्टाफ का शुरू हुआ मेडिकल परीक्षण
उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने सेफटी कैटेगरी और रनिंग स्टाफ के लिए अनिवार्य मेडिकल परीक्षण का विस्तार किया है। तमाम स्टाफ का परीक्षण भी किया गया है। ताकि रेलवे की चिकित्सा सुविधाएं कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए उपलब्ध रहे। उधर, बड़े स्टेशनों के यार्ड में पास होने के दौरान मालगाड़ी की अधिकतम स्पीड भी रेलवे ने 15 किमी प्रतिघंटा निर्धारित की है।