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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Sakat Chauth: Gauri's son Ganesha was worshiped with rituals for the longevity of children

सकट चौथ : संतान की दीर्घायु के लिए विधि विधान से पूजे गए गौरी पुत्र गणेश, घरों से लेकर मंदिरों तक लगी रही भीड़

Mon, 29 Jan 2024 03:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 29 Jan 2024 03:14 PM IST
सार

सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुण्डी चतुर्थी, माही चौथ और तिल कुटा चौथ भी कहा जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। यह व्रत बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।

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Sakat Chauth: Gauri's son Ganesha was worshiped with rituals for the longevity of children
सकट चौथ पर भगवान गणेश की विधि-विधान से हुई पूजा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संतान की दीर्घायु और मंगलमय जीवन के लिए माताओं ने सोमवार को सकट चौथ का व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना की। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की श्रद्धा पूर्वक पूजा की जाती है। साथ रात में चंद्रमा की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।

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सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुण्डी चतुर्थी, माही चौथ और तिल कुटा चौथ भी कहा जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। यह व्रत बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरी पुत्र गणेश, सकट माता और चंद्र देव की पूजा पूरे विधि विधान से की गई। संगम तट पहुंचकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इसके पहले गंगा स्नान भी किया। इसके अलावा घरों और मंदिरों में भी पूजा अर्चना की गई।

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लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर, जनेऊ, सुपारी, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, गंगाजल, गणपति की मूर्ति, लाल फूल, 21 गांठ दूर्वा, रोली, मेहंदी, सिंदूर, अक्षत, हल्दी, मौली, इत्र, अबीर, गुलाल, गाय का धी, दीप, धूप, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, मौसमी फल आदि का अर्पण किया गया। 
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व्रत के चलते महंगी हो गई पूजन सामग्री

सकट चौथ का त्योहार सोमवार को मनाया गया। त्योहारी सामान सिंघाड़ा, तिल व शकरकंद के भाव उछल गए। त्योहार को लेकर रविवार की शाम तक खरीदारी  की गई। त्योहार से पहले पूजन सामग्री शकरकंद, सिंघाड़ा, रामदाना, तिल के दाम बढ़ गए हैं। 80 रुपये धरा (6.5) किलो वाली शकरकंद रविवार को 150 रुपये की दर से मिली। 60 की जगह सिंघाड़ा 80 से 100 रुपये किलो तक बिका। काला तिल 240 रुपया प्रति किलो तो सफेद तिल 250 से 260 रुपया प्रति किलो बिका। रामदाना 150 रुपया प्रति किलो बिका। इसी तरह कपड़े की भी खूब खरीदारी हुई। 

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