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गंगा-यमुना के निचले स्तरों में बाढ़ के खतरे की घंटी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 24 Jul 2018 12:35 AM IST
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इलाहाबाद
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गंगा, यमुना के तटवर्ती निचले स्तरों वाली बस्तियों बाढ़ को लेकर खतरे की घंटी बज गई है। पिछले तीन दिनों के भीतर तेजी से बढ़े जल स्तर के चलते दो दर्जन से अधिक इलाकों में चिंता बढ़ गई है। इसी रफ्तार से जलस्तर में इजाफा होता रहा तो अगले तीन से चार दिनों में इन बस्तियों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाएगा। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग अभी से सुरक्षित स्थानों की ठिकाना तलाशने लगे हैं, ताकि समय रहते गृहस्थी समेटी जा सके। उधर, बाढ़ से बचाव के लिए एनडीआरएफ तैनात कर दी गई है और राहत शिविरों के लिए स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। गंगा-यमुना के तटबंधों के फाटक दुरुस्त कर निगरानी बढ़ा दी गई है।
हफ्ते भर के भीतर तीन मीटर से अधिक गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के चलते संगम क्षेत्र में दुश्वारियां पैदा हो गई हैं। सोमवार को महावीर मार्ग पर गंगा की लहरें पहुंच गईं। संगम नोज घाट से भी पानी आगे बढ़ने लगा है। देर शाम गंगा का जलस्तर 76.910 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि रविवार की शाम जलस्तर 76.730 मीटर रिकार्ड किया गया था। यमुना का जल स्तर रविवार को जहां 73,650 मीटर था, वहीं इस शाम 74.640 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दोपहर बाद गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से घटाव शुरू हो गया लेकिन पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश होने की आशंका से किसी भी समय जलस्तर में बढ़ाव होने का अनुमान है। जल स्तर बढ़ा तो यमुना के तटीय ककराघाट, करेलाबाग, सदियाबाद, बख्शीमोढ़ा, गऊघाट के अलावा गंगा के तटीय सलोरी, बाघाड़ा, चांदपुर, राजपुर, बेली कछार, ऊंचागढ़, ओमनगर, नेवादा, गंगापुर, बलुआ घाट, नाग वासुकि, दारागंज, अल्लापुर के निचले स्तरों में सबसे पहले पानी घुसेगा। इन इलाकों में बाढ़ के खतरे की आशंका पैदा हो गई है।
प्वाइंटर
76.910 मीटर पर पहुंचीं गंगा
74.650 मीटर के जलस्तर पर यमुना
01 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा में शुरू हुआ घटाव
बाढ़ की आशंका को देखते हुए गंगा-यमुना के प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए वाराणसी से बुलाई गई एनडीआरएफ की 11वीं बटालियन तैनात कर दी गई है। इस बटालियन के कमांडेंट आलोक कुमार के निर्देश पर टीम कमांडर धीरेंद्र उपाध्याय ने जल स्तर बढ़ने के बाद जवानों के साथ निचले स्तरों के रूप में चिह्नित बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया। एनडीआरएफ ने प्रभावित बस्तियों के लोगों से पूर्व के बाढ़ के अनुभवों और अब तक की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। इस बटालियन के साथ प्रशिक्षित गोताखोरों के अलावा आईआरबी बोट और तैराक भी तैनात किए गए हैं,ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी तरह की स्थिति से निबटा जा सके। बाढ़ की आशंका को देखते हुए बेनी बांध पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। यहां चार शिफ्ट में कर्मचारी 24 घंटे ड्यूटी देंगे। गंगा-यमुना के जल स्तर की हर घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। नरोरा, नैनी, फाफामऊ से कंट्रोल रूम के कर्मचारी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। प्रयाग में बाढ़ की आशंका को देखते हुए गंगा-यमुना के चार तटबंधों पर लगे फाटकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। बख्शीबांध के दो फाटकों के अलावा यमुना बंध-1 के दो फाटकों की ग्रीसिंग, आयलिंग करा ली गई है, ताकि जल स्तर बढ़ने पर फाटकों को तत्परता से खोला जा सके। बेनीबंध और यमुनाबंध-2 पर भी नजर रखी जा रही है।
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हफ्ते भर के भीतर तीन मीटर से अधिक गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के चलते संगम क्षेत्र में दुश्वारियां पैदा हो गई हैं। सोमवार को महावीर मार्ग पर गंगा की लहरें पहुंच गईं। संगम नोज घाट से भी पानी आगे बढ़ने लगा है। देर शाम गंगा का जलस्तर 76.910 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि रविवार की शाम जलस्तर 76.730 मीटर रिकार्ड किया गया था। यमुना का जल स्तर रविवार को जहां 73,650 मीटर था, वहीं इस शाम 74.640 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दोपहर बाद गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से घटाव शुरू हो गया लेकिन पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश होने की आशंका से किसी भी समय जलस्तर में बढ़ाव होने का अनुमान है। जल स्तर बढ़ा तो यमुना के तटीय ककराघाट, करेलाबाग, सदियाबाद, बख्शीमोढ़ा, गऊघाट के अलावा गंगा के तटीय सलोरी, बाघाड़ा, चांदपुर, राजपुर, बेली कछार, ऊंचागढ़, ओमनगर, नेवादा, गंगापुर, बलुआ घाट, नाग वासुकि, दारागंज, अल्लापुर के निचले स्तरों में सबसे पहले पानी घुसेगा। इन इलाकों में बाढ़ के खतरे की आशंका पैदा हो गई है।
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76.910 मीटर पर पहुंचीं गंगा
74.650 मीटर के जलस्तर पर यमुना
01 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा में शुरू हुआ घटाव
बाढ़ की आशंका को देखते हुए गंगा-यमुना के प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए वाराणसी से बुलाई गई एनडीआरएफ की 11वीं बटालियन तैनात कर दी गई है। इस बटालियन के कमांडेंट आलोक कुमार के निर्देश पर टीम कमांडर धीरेंद्र उपाध्याय ने जल स्तर बढ़ने के बाद जवानों के साथ निचले स्तरों के रूप में चिह्नित बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया। एनडीआरएफ ने प्रभावित बस्तियों के लोगों से पूर्व के बाढ़ के अनुभवों और अब तक की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। इस बटालियन के साथ प्रशिक्षित गोताखोरों के अलावा आईआरबी बोट और तैराक भी तैनात किए गए हैं,ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी तरह की स्थिति से निबटा जा सके। बाढ़ की आशंका को देखते हुए बेनी बांध पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। यहां चार शिफ्ट में कर्मचारी 24 घंटे ड्यूटी देंगे। गंगा-यमुना के जल स्तर की हर घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। नरोरा, नैनी, फाफामऊ से कंट्रोल रूम के कर्मचारी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। प्रयाग में बाढ़ की आशंका को देखते हुए गंगा-यमुना के चार तटबंधों पर लगे फाटकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। बख्शीबांध के दो फाटकों के अलावा यमुना बंध-1 के दो फाटकों की ग्रीसिंग, आयलिंग करा ली गई है, ताकि जल स्तर बढ़ने पर फाटकों को तत्परता से खोला जा सके। बेनीबंध और यमुनाबंध-2 पर भी नजर रखी जा रही है।
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