{"_id":"0708dcec28b1ec1b857ad90f1a8ea4cb","slug":"respect-of-largesse-being-shared-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेवड़ी की तरह बांटा जा रहा सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेवड़ी की तरह बांटा जा रहा सम्मान
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 27 Feb 2015 01:01 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रयाग में बृहस्पतिवार को ‘इलाहाबाद जिंदाबाद’ के जयघोष से संगमनगरी को सलाम करने वाले जाने माने कलाकार पद्मश्री ओमपुरी ने तमाम हस्तियों को बांटे जा रहे पद्म सम्मान पर सवाल उठाया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उसके चयन और पारदर्शिता को लेकर सवाल जरूर खड़े किए। बोले, मुझे पद्मश्री नहीं सिर्फ ‘ओपीई’ कहिए।
मोदी सरकार पर भी टिप्पणी की। कहा, यह सरकार तो अभी पैदा हुई है, इसे हाथ पैर फैलाने में अभी वक्त लगेगा। हालांकि उन्होंने स्वच्छता अभियान की तारीफ करते हुए लोगों से आसपास सफाई रखने की अपील की। सलाह दी, खुद सफाई के लिए आगे आएंगे तभी देश स्वच्छ रहेगा। खुशी है, देश में दंगों की संख्या कम हुई है। इससे पहले उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। अवार्ड के बाद ओमपुरी ने कहा, सम्मान ऊर्जा और थपथपाहट की तरह है। सफलता मिलने पर रुकना नहंीं हौसले से आगे बढ़ते रहने की कोशिश करनी चाहिए। ठहरने का मतलब खत्म होना है।
संगम नगरी में जेड एेंड जेड मीडिया की ओर से पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफपी) के साथ संगमनगरी को नई पहचान मिली। सांस्कृतिक केंद्र में हुए महोत्सव में जाने-माने कलाकार ओमपुरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित डॉ.बीएस राजपूत, डॉ.सुदीप जैन को हेल्थ एक्सपर्ट अवार्ड और राजेश पांडेय को आर्ट एनिशियेटिव अवार्ड दिया गया। निर्देशक तिग्मांशु धूलिया, सीमा कपूर, आलोचक अमित गांगर जैसी हस्तियों ने दीप जलाकर महोत्सव का उद्घाटन किया मगर महोत्सव में दर्शकों की कमी सभी को अखरती रही।
विज्ञापन
बतौर मुख्य अतिथि ओमपुरी ने कहा कि फिल्म महोत्सव से संगम नगरी को एक नई पहचान तो मिली ही, फिल्म निर्माण में रुचि रखने वाले युवाओं को भी मंच मिलेगा। निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने कहा, यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां के लिए मैं हर काम छोड़कर आने को तैयार हूं। इलाहाबाद में फिल्म मेकिंग का स्कोप है। इसके लिए थियेटर को बढ़ावा देना होगा। वैसे युवाओं को सिर्फ एक्टिंग ही नहीं बल्कि फिल्म निर्माण के दूसरी विधाओं में भी आगे आना चाहिए। उन्होंने अपनी फिल्म ‘यारा’ के बारे में भी जानकारी दी।
सीमा कपूर ने कहा, संगम नगरी तो साहित्य नगरी है। यहां फिल्म महोत्सव से साहित्य को भी बढ़ावा मिलेगा। अमित गांगर ने फिल्म महोत्सव को ट्रेनिंग स्कूल की संज्ञा दी। जेड एंड जेड मीडिया के एमडी हसन हैदर ने कहा, फिल्म महोत्सव का मकसद बताया। संचालन राशि कुमार ने किया।
महोत्सव के पहले दिन लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर आधारित फिल्म जय जवान जय किसान दिखाई गई। मिलन अजमेरा की ओर से निर्देशित और अखिलेश जैन, ओम पुरी, जतिन खुराना, प्रेम चोपड़ा, रति अग्निहोत्री और जयवंत पाटेकर जैसे सधे हुए कलाकारों से सजी फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया। धीरज मिश्रा की कहानी और स्क्रीनप्ले को भी सराहना मिली। इसी क्रम में महोत्सव में पांच फिल्में भी दिखाई गईं जिसमें नो वुमेंस लैंड के साथ ही अफगानिस्तान की माई सिन फिल्म भी थी।
विज्ञापन
मोदी सरकार पर भी टिप्पणी की। कहा, यह सरकार तो अभी पैदा हुई है, इसे हाथ पैर फैलाने में अभी वक्त लगेगा। हालांकि उन्होंने स्वच्छता अभियान की तारीफ करते हुए लोगों से आसपास सफाई रखने की अपील की। सलाह दी, खुद सफाई के लिए आगे आएंगे तभी देश स्वच्छ रहेगा। खुशी है, देश में दंगों की संख्या कम हुई है। इससे पहले उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। अवार्ड के बाद ओमपुरी ने कहा, सम्मान ऊर्जा और थपथपाहट की तरह है। सफलता मिलने पर रुकना नहंीं हौसले से आगे बढ़ते रहने की कोशिश करनी चाहिए। ठहरने का मतलब खत्म होना है।
विज्ञापन
संगम नगरी में जेड एेंड जेड मीडिया की ओर से पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफपी) के साथ संगमनगरी को नई पहचान मिली। सांस्कृतिक केंद्र में हुए महोत्सव में जाने-माने कलाकार ओमपुरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित डॉ.बीएस राजपूत, डॉ.सुदीप जैन को हेल्थ एक्सपर्ट अवार्ड और राजेश पांडेय को आर्ट एनिशियेटिव अवार्ड दिया गया। निर्देशक तिग्मांशु धूलिया, सीमा कपूर, आलोचक अमित गांगर जैसी हस्तियों ने दीप जलाकर महोत्सव का उद्घाटन किया मगर महोत्सव में दर्शकों की कमी सभी को अखरती रही।
विज्ञापन
बतौर मुख्य अतिथि ओमपुरी ने कहा कि फिल्म महोत्सव से संगम नगरी को एक नई पहचान तो मिली ही, फिल्म निर्माण में रुचि रखने वाले युवाओं को भी मंच मिलेगा। निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने कहा, यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां के लिए मैं हर काम छोड़कर आने को तैयार हूं। इलाहाबाद में फिल्म मेकिंग का स्कोप है। इसके लिए थियेटर को बढ़ावा देना होगा। वैसे युवाओं को सिर्फ एक्टिंग ही नहीं बल्कि फिल्म निर्माण के दूसरी विधाओं में भी आगे आना चाहिए। उन्होंने अपनी फिल्म ‘यारा’ के बारे में भी जानकारी दी।
सीमा कपूर ने कहा, संगम नगरी तो साहित्य नगरी है। यहां फिल्म महोत्सव से साहित्य को भी बढ़ावा मिलेगा। अमित गांगर ने फिल्म महोत्सव को ट्रेनिंग स्कूल की संज्ञा दी। जेड एंड जेड मीडिया के एमडी हसन हैदर ने कहा, फिल्म महोत्सव का मकसद बताया। संचालन राशि कुमार ने किया।
महोत्सव के पहले दिन लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर आधारित फिल्म जय जवान जय किसान दिखाई गई। मिलन अजमेरा की ओर से निर्देशित और अखिलेश जैन, ओम पुरी, जतिन खुराना, प्रेम चोपड़ा, रति अग्निहोत्री और जयवंत पाटेकर जैसे सधे हुए कलाकारों से सजी फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया। धीरज मिश्रा की कहानी और स्क्रीनप्ले को भी सराहना मिली। इसी क्रम में महोत्सव में पांच फिल्में भी दिखाई गईं जिसमें नो वुमेंस लैंड के साथ ही अफगानिस्तान की माई सिन फिल्म भी थी।