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नाइट अलाउंस की रिकवरी के आदेश से नाराजगी, बोर्ड तक पहुंचा मामला
Mon, 12 Oct 2020 11:11 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 12 Oct 2020 11:11 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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हजारों रेलकर्मियों को नाइट अलाउंस के दायरे से बाहर करने एवं बीते सवा तीन साल के दौरान नाइट अलाउंस की रिकवरी के आदेश ने रेल कर्मियों की नाराजगी बढ़ा दी है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज ही नहीं, झांसी और आगरा मंडल में भी रेलवे के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। रेल यूनियनों के पदाधिकारियों ने यह मामला रेल मंत्रालय एवं बोर्ड तक पहुंचाने के साथ ही यह आदेश वापस लेने की मांग की है।
दरअसल रेलवे बोर्ड के एक आदेश के तहत नाइट अलाउंस पाने वाले हजारों रेलकर्मी बाहर कर दिए गए हैं। बोर्ड ने एक जुलाई 2017 से मूल वेतन 43600 रुपये से ऊपर वाले रेलकर्मियों का नाइट ड्यूटी अलाउंस बंद किया है। इसके अलावा ऐसे रेलकर्मी जिनका वेतन 43600 रुपये से अधिक है और जो एक जुलाई 17 के बाद भी नाइट अलाउंस पा चुके हैं उनसे रिकवरी करने का भी फरमान जारी किया है।
रेलवे के इस निर्णय का कर्मचारियों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। रेलकर्मियों का कहना है कि गार्ड, ड्राइवर, टिकट चेकिंग स्टाफ, कंट्रोलर समेत तमाम रनिंग स्टाफ रात्रि कालीन ड्यूटी करता है। बोर्ड द्वारा इन रेलकर्मियों को नाइट अलाउंस के दायरे से बाहर करना गलत है। नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के महामंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि मान्यता प्राप्त फेडरेशनों के ढुलमुल रवैये के कारण रेलवे बोर्ड निरंकुश हो गया है। इस मुद्दे पर देश व्यापी आंदोलन के लिए रविवार 11 अक्तूबर को नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे से जुड़े सभी संगठनों की वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई है ।
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दरअसल रेलवे बोर्ड के एक आदेश के तहत नाइट अलाउंस पाने वाले हजारों रेलकर्मी बाहर कर दिए गए हैं। बोर्ड ने एक जुलाई 2017 से मूल वेतन 43600 रुपये से ऊपर वाले रेलकर्मियों का नाइट ड्यूटी अलाउंस बंद किया है। इसके अलावा ऐसे रेलकर्मी जिनका वेतन 43600 रुपये से अधिक है और जो एक जुलाई 17 के बाद भी नाइट अलाउंस पा चुके हैं उनसे रिकवरी करने का भी फरमान जारी किया है।
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रेलवे के इस निर्णय का कर्मचारियों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। रेलकर्मियों का कहना है कि गार्ड, ड्राइवर, टिकट चेकिंग स्टाफ, कंट्रोलर समेत तमाम रनिंग स्टाफ रात्रि कालीन ड्यूटी करता है। बोर्ड द्वारा इन रेलकर्मियों को नाइट अलाउंस के दायरे से बाहर करना गलत है। नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के महामंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि मान्यता प्राप्त फेडरेशनों के ढुलमुल रवैये के कारण रेलवे बोर्ड निरंकुश हो गया है। इस मुद्दे पर देश व्यापी आंदोलन के लिए रविवार 11 अक्तूबर को नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे से जुड़े सभी संगठनों की वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई है ।
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- यूनियन को बिना संज्ञान में लिए बिना बोर्ड ने एक तरफा आदेश जारी कर दिया है। एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने रेलमंत्री और सीआरबी को पत्र लिखा है। अगर आदेश वापस न हुआ तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। - आरडी यादव, महामंत्री नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन।
- रेलवे बोर्ड ने बिना एनएफआईआर को संज्ञान में लिए बिना डीओपीटी के यहां भेज दिया है। फेडरेशन के महामंत्री राघवैय्या ने बोर्ड के इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार रिकवरी का आदेश तत्काल रोके। - आरपी सिंह, महामंत्री नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ।