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Mahakumbh : हवाई जहाज से साल स्लीपर देखने गए अफसरों की रिपोर्ट भी हवा-हवाई, पुल के निर्माण में हो सकती है देरी

Sat, 05 Oct 2024 02:49 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, अमर उजाला प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 05 Oct 2024 02:49 PM IST
सार

13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में इस बार 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। योगी सरकार ने यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की ठानी है। इसी कड़ी में गंगा पर 30 पांटून पुलों का निर्माण होना है।

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report of the officers who went to see the Sal Sleeper by plane is also in the air
महाकुंभ में पांटून ब्रिज निर्माण के लिए मंगाए गए साल स्लीपर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ के लिए हवाई जहाज से साल स्लीपर की उपलब्धता जांचकर रायपुर से लौटे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की रिपोर्ट कोरी प्रतीत हो रही है। इसमें एसई और एक्सईएन ने 35,100 साल स्लीपर और 4,500 साल एजिंग होने का दावा किया था। लेकिन, इनकी 45 दिन बाद भी आपूर्ति नहीं हो सकी। इससे पांटून पुलों के निर्माण में देरी की आशंका ने चिंता की लकीरें गहरा दी हैं।

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13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में इस बार 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। योगी सरकार ने यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की ठानी है। इसी कड़ी में गंगा पर 30 पांटून पुलों का निर्माण होना है। इसके लिए 9300 घनमीटर साल स्लीपर और साल एजिंग (गोल वाली लकड़ी) की आपूर्ति का ठेका रायपुर की पांच टिंबर कंपनियों को दिया गया है।
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आपूर्ति के लिए अनुबंधित पांच कंपनियों में मेसर्स धोरमनाथ ट्रेडर्स, अनमोल टिंबर्स, नथानी टिंबर्स,केएन पटेल एंड कंपनी और मेसर्स धोरमनाथ ट्रेडिंग कंपनी के नाम शामिल हैं। ये कंपनियां शुरू से ही आपूर्ति को लेकर सवालों के घेरे में हैं। पिछले पखवारे भर से लकड़ी का भंडारण न होने की वजह से पासिंग प्रभावित हो गई है।

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महाकुंभ में पांटून पुल बनाने के लिए साल स्लीपर की आपूर्ति शुरू। - फोटो : अमर उजाला।

बीते चार दिनों में वन निगम के अधिकारियों की अनुपस्थिति में पीडब्ल्यूडी की एक्सपर्ट टीमों ने एकतरफा परीक्षण किया है। लकड़ी का भंडारण खत्म होने के संकट के बीच अधीक्षण अभियंता (एसई) देवेंद्र सिंह और अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुरेंद्र सिंह की मेलाधिकारी और प्रमुख सचिव को बीते 21 अगस्त को भेजी गई लकड़ी की उपलब्धता संबंधी निरीक्षण आख्या चर्चा में है।

इस रिपोर्ट में एसई और एक्सईएन ने ठेका लेने वाली पांचों कंपनियों की 27 आरा मशीनों पर 35,100 साल स्लीपर, 4,500 साल एजिंग को मिलाकर 4350 घनमीटर लकड़ी की उपलब्धता बताई गई है। इसी तरह 4,500 घनमीटर साल वुड की उपलब्धता की रिपोर्ट दी गई है। लेकिन, रिपोर्ट दिए 45 दिन बीत गए और शुक्रवार शाम तक 24,792 साल स्लीपर की आपूर्ति ही संभव हो सकी है।

सवाल उठ रहे हैं कि हवाई यात्रा के बाद एसई और एक्सईएन ने रायपुर की आरा मशीनों पर जो साल स्लीपर तैयार बताए थे, वह कहां गए। पांच नवंबर तक इन कंपनियों को 9,300 घनमीटर साल स्लीपर की आपूर्ति करनी है। लकड़ी उपलब्ध नहीं होने से ठेका कंपनियों को भटकना पड़ रहा है।

42.30 घनमीटर साल स्लीपर रिजेक्ट

रायपुर से लाई जा रही साल स्लीपर की खेप में से 42.30 घनमीटर लकड़ी मानक के विपरीत पाए जाने पर रिजेक्ट कर दी गई है। हालांकि, इसके बाद भी कटी-फटी और अंडर साइज्ड लकड़ियां स्टोर में रखवा ली गई हैं। कहा जा रहा है कि तुरंत इसकी जांच हो जाए तो आपूर्ति की सच्चाई सामने आ जाएगी।

जो रिपोर्ट मैंने दी है, उसमें अंतर नहीं आएगा। रायपुर में लकड़ी पर्याप्त है। जिन कंपनियों को ठेका दिया गया है, वह आपूर्ति कर रही हैं। समय पर काम पूरा हो जाएगा। - देवेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी।

ओडिशा से बिना बिल लकड़ी लाने पर रायपुर में एफआईआर

महाकुंभ के लिए बिना कागज के ओडिशा से लाई जा रही लकड़ी पकड़े जाने के बाद रायपुर वन मंडल के एसडीओ ने प्राथमिकी दर्ज करा दी है। पकड़ी गई लकड़ी मेसर्स धोरमनाथ की सहयोगी कंपनी पवन टिंबर्स की ओर से लाई जा रही थी।

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