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Prayagraj : जाने माने अधिवक्ता शांतिभूषण का प्रयागराज से था गहरा नाता, काफी समय पहले वह आए थे अपने बंगले पर

Tue, 31 Jan 2023 09:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 31 Jan 2023 09:50 PM IST
सार

देश के जाने माने अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांति भूषण के निधन पर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने शोक जताया है। शांति भूषण का प्रयागराज से गहरा नाता है। उनका एक बंगला भी सिविल लाइंस में है। काफी समय पहले वह एक मुकदमे के सिलसिले में प्रयागराज आए थे। 

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Renowned advocate Shanti Bhushan had a deep connection with Prayagraj, he had come to his bungalow a long time
पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

विस्तार

देश के जाने माने अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांति भूषण के निधन पर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने शोक जताया है। शांति भूषण का प्रयागराज से गहरा नाता है। उनका एक बंगला भी सिविल लाइंस में है। काफी समय पहले वह एक मुकदमे के सिलसिले में प्रयागराज आए थे। बाद में तबीयत खराब हो जाने के बाद उनका यहां आना जाना बंद हो गया था। हालांकि उनके पुत्र प्रशांत भूषण का आना जाना अक्सर लगा रहता है। 

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शांति भूषण के निधन पर अधिवक्ताओं में शोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सदस्य रहे एवं पूर्व मंत्री शांति भूषण के निधन पर शोक जताया है। अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने कहा कि बार ने एक कुशल अधिवक्ता और न्याय क्षेत्र का एक योद्धा खो दिया है। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है।

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उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की १५०वीं वर्षगांठ पर उन्हें आमंत्रित करने के लिए उनके पुत्र प्रशांत भूषण से बातचीत की गई थी लेकिन उनके पुत्र ने बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इस वजह से उनका आना मुश्किल हो गया। अगर वह स्वस्थ्य होते तो वह इस कार्यक्रम का हिस्सा होते।

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अध्यक्ष ने कहा कि वह हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य और यहीं से वरिष्ठ अधिवक्ता बने थे। उनके निधन पर बार एसोसिएशन शोक जताती है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करती है। शोक जताने वालों में महासचिव एसडी सिंह जादौन, पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय, आशुतोष त्रिपाठी, वशिष्ठï तिवारी, मत्युंजय त्रिपाठी वेणु गोपाल, सहित, बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे।




 

शांति भूषण के डेमोक्रेटिक लॉयर फ्रंट ने इमरजेंसी के खिलाफ उठाई थी पहली आवाज - टीपी सिंह

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष टीपी सिंह ने कहा कि इमरजेंसी का वक्त था और कोई भी सत्ता के विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। तब अधिवक्ताओं को एकजुट किया गया। इसके लिए डेमोक्रेटिक लॉयर फ्रंट बनाया गया। शांति भूषण इस फ्रंट के अध्यक्ष और मैं सचिव था। इमरजेंसी के खिलाफ अधिवक्ताओं को एकजुट करने के लिए हमने पूरे यूपी का दौरा किया।

कानपुर, वाराणसी, इटावा और पश्चिमी यूपी के कई शहरों में हम साथ गए। इन शहरों में हम मीटिंग किया करते थे और अधिवक्ताओं को साथ जोड़ते चलते थे। डेमोक्रेटिक लॉयर फ्रंट की कोशिशों का नतीजा था कि धीमे-धीमे इमरजेंसी के खिलाफ आवाज उठने लगी और लोग सड़क पर निकले। इंदिरा गांधी के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर मैंने और आरसी श्रीवास्तव ने ग्राउंड वर्क किया।

इसके बाद इंदिरा गांधी को क्रॉस एग्जामिन करने का वक्त आया तो हमने शांति भूषण जी से आग्रह किया। मामला राष्ट्रीय महत्व का था और इसमें शांति भूषण जैसे किसी दिग्गज अधिवक्ता की आवश्यकता था। शांति भूषण जी इंदिरा गांधी के खिलाफ केस लड़ने को तैयार हो गए। एक अधिवक्ता के रूप में वह बहुत ही मेहनती और प्रोफेशनल थे। हालंकि, वह काफी रिजर्व रहा करते थे। वर्ष 1977 तक उनके साथ लगातार संपर्क में रहा। कानून के तमाम दांव पेंच उनसे सीखे। इसके बाद वह देश के कानून मंत्री बन गए। उनका जाना अपूर्णनीय क्षति है।

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