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हाईकोर्ट : अतिक्रमण मामले में आगरा के राधास्वामी सत्संग भवन को राहत, ध्वस्तीकरण की करवाई को रद्द किया

Sat, 11 Nov 2023 01:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Nov 2023 01:36 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने राधा स्वामी सत्संग सभा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इस मामले में इसके पहले कोर्ट ने 16 अक्तूबर को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था और फैसला आने तक मौके पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था।

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Relief to Radhaswami Satsang Bhavan of Agra in encroachment case, demolition action canceled
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के दयालबाग स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के 14 सितंबर के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से विचार करने को कहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की करवाई का आदेश पारित करने से पूर्व उसे सुनवाई का पूरा मौका नहीं दिया, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। लिहाजा, सुनवाई का पूरा मौका देने के बाद जिला प्रशासन कानून के अनुसार निर्णय ले।

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यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने राधा स्वामी सत्संग सभा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इस मामले में इसके पहले कोर्ट ने 16 अक्तूबर को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था और फैसला आने तक मौके पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था।
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राज्य सरकार की तरफ से कहा गया था कि याची ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, जिस पर कार्रवाई की गई।

याची का कहना है कि प्रशासन जिस जमीन को जबरन खाली कर रहा है, वह सत्संग सभा के नाम से ही है। प्रशासन ने मनमाने तरीके से न सिर्फ बुलडोजर चलाया, बल्कि सत्संगियों पर लाठीचार्ज भी किया। याचिका में 1935 से 2012 तक हुए सभी एग्रीमेंट , लीज डीड व आदेशों की कॉपी लगाई गई थी। इसके साथ 19 सितंबर 2023 को तहसीलदार के नोटिस का जबाब व संबंधित भूखंडों के राजस्व रिकॉर्ड को भी याचिका में शामिल किया गया था। सरकार की ओर से भी खसरा खतौनी के अलावा अन्य राजस्व रिकॉर्ड और दो दर्जन से ज्यादा पेजों के जवाब के साथ पुलिस के साथ हुई मारपीट के फोटोग्राफ भी लगाए गए थे।

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गौरतलब है कि जमीन खाली कराने के दौरान सत्संगियों की तरफ से पथराव किया गया था, जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज में 50 के करीब सत्संगी घायल हुए। पथराव में कई पुलिस वालों को भी चोटें आईं थीं। याची की ओर से मांग की गई थी कि खासपुर और जगन्नाथपुर में खसरा नंबर 297/473, 309, 310, 311, 273 की भूमि उसकी है। जिला प्रशासन ने उसे सुने बिना एकतरफा आदेश पारित कर दिया। जबकि, उसकी ओर से जवाब देने के लिए समय की मांग की गई थी। लेकिन, प्रशासन ने समय नहीं दिया, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने भी याची के इस तर्क को सही माना और इसी आधार पर उसकी याचिक को स्वीकार करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द कर दिया और याची के प्रत्यावेदन पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।

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