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राहत : माडल नियोजक को कर्मी के शोषण का अधिकार नहीं - हाईकोर्ट

Fri, 01 Oct 2021 08:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 01 Oct 2021 08:51 PM IST
सार

  • वर्कचार्ज कर्मी को 15 साल की सेवा के बाद हटाना अवैध करार, समायोजन का निर्देश

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Relief: Model employer has no right to exploit the worker - High Court
इलाहाबाद उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार माडल नियोजक है इसलिए इसको किसी भी कर्मचारी का शोषण करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दस साल से वर्कचार्ज के रुप में सेवारत तीन कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्यु के बाद उनकी पत्नियों से 15 साल तक वर्कचार्ज कर्मी की सेवा लेने के बाद उनको हटा देने के आदेश को मनमानापूर्ण व अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने याचियों को समायोजित कर नियमित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इनको किसी भी विभाग में तैनात करने की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मुरादाबाद के स्थानीय निकाय कर्मी हरवती व दो अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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याचियों के पति 1990 से 1994 के बीच नियुक्त किए गए। दस साल की सेवा के बाद उनकी मृत्यु हो गई। पत्नियों ने आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की। 2004 व 2005 में इनकी 18000 रुपये वेतन पर नियुक्ति की गई। 15 साल की सेवा के बाद नौ नवंबर 2020 को यह कहते हुए काम करने से रोक दिया कि अब जरूरत नहीं है। जिसे चुनौती दी गई। निकाय की तरफ से कहा गया कि याचीगण की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में नहीं की गई है। इनके पति वर्कचार्ज कर्मी थे, आश्रित कोटे में नियुक्ति का अधिकार नहीं है। ये सरकारी सेवक नहीं, वर्कचार्ज कर्मी हैं। कोर्ट ने उमा देवी केस सहित तमाम फैसलों पर विचार करते हुए कहा कि सेवा से हटाने का आदेश अवैध है।
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