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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Rejects the amendment application of the respondent in the Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Eidgah case.

High Court : श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में प्रतिवादी की संशोधन अर्जी खारिज की

Sun, 19 Apr 2026 03:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Apr 2026 03:14 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामले में प्रतिवादी के लिखित बयान में संशोधन अर्जी खारिज कर दी है।

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Rejects the amendment application of the respondent in the Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Eidgah case.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामले में प्रतिवादी के लिखित बयान में संशोधन अर्जी खारिज कर दी है। कहा कि जब मूल लिखित बयान ही विधि के अनुरूप नहीं है तो उसमें संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट बनाम शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधन कमेटी के मामले में दिया।

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शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधन कमेटी की ओर से अर्जी दाखिल कर लिखित बयान में संशोधन की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि वाद में आस्था के अस्तित्व से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है और न ही वाद के लिए कार्रवाई का कारण स्पष्ट किया गया है।
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शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधन कमेटी ने दलील दी कि ये संशोधन मुद्दों के निर्धारण के लिए आवश्यक हैं। सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने इसका विरोध किया। कहा कि वाद में आस्था के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इस तरह के संशोधन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी दलील दी गई कि पहले ही आदेश 7 नियम 11 के तहत दाखिल आवेदन खारिज हो चुका है। इसलिए अब संशोधन का अधिकार नहीं बचता।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि प्रतिवादी का लिखित बयान न तो अधिकृत हस्ताक्षर से युक्त है और न ही उसमें आवश्यक सत्यापन किया गया है। जो आदेश 6 नियम 14 व 15 सीपीसी के तहत अनिवार्य है। इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा त्रुटिपूर्ण लिखित बयान कानून के अनुरूप नहीं है। इसलिए उसमें संशोधन की अर्जी इस स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकती और इसे खारिज किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी की ओर से दायर एक अन्य अर्जी जिसमें इन त्रुटियों को दूर करने की अनुमति मांगी गई है, अभी विचाराधीन है। मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की गई है।

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