Raksha bandhan 2022 : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मंत्नी नंदी ने बंधवाई राखी
डीएम संजय कुमार खत्री ने राजकीय बाल गृह, बाल गृह बालिका, राजकीय महिला शरणालय एवं संप्रेषण गृह का निरीक्षण किया। डीएम ने बालिकाओं एवं महिलाओं से राखी भी बंधवाई। इस मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व जगदंबा सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र आदि शामिल रहे।
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कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने भी रक्षाबंधन की बधाई दी। मुट्ठीगंज स्थित कार्यालय में आईं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई। इसके बाद पुलिस लाइन पहुंचे नंदी ने महिला आरक्षियों से भी राखी बंधवाई।
डीएम संजय कुमार खत्री ने राजकीय बाल गृह, बाल गृह बालिका, राजकीय महिला शरणालय एवं संप्रेषण गृह का निरीक्षण किया। डीएम ने बालिकाओं एवं महिलाओं से राखी भी बंधवाई। इस मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व जगदंबा सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र आदि शामिल रहे। ब्यूरो
मुस्लिम भाइयाें ने भी बंधवाई राखी
सपा नेता इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमजा ने सड़क के किनारे रह रहे गरीबों बहनों से राखी बंधवाई। साथ ही चाकलेट, मिठाई आदि वितरित की।
यास्मीन के बाद सादमा ने बांधी ने शिव मंदिर के व्यवस्थापक की कलाई पर राखी
मुसीबत में काम आए शिव मंदिर के व्यवस्थापक को भाई मानकर राखी बांधने वाली उनकी बहन यास्मीन अब इस दुनिया में नहीं रहीं। कोरोना महामारी ने पिछले वर्ष उनको हमेशा के लिए छीन लिया। अब इस बार रक्षाबंधन पर शिव मंदिर के व्यवस्थापक ने नेह के बंधन से अपनी कलाई सजाने के लिए दूसी मुस्लिम बहन ढूंढ ली। इस बार सादमा से उन्होंने अपनी कलाई पर राखी बंधवाई है।
कोरोना संक्रमण से एक मुस्लिम बहन के खोने के बाद रानीमंडी स्थित शंभूनाथ मंदिर के व्यवस्थापक धीरज साहू ने इस बार भी मिसाल पेश की है। अतरसुइया की यास्मीन से बहन का उनका रिश्ता जुड़ने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। करीब 18 वर्ष पहले एक रोज रात करीब 12 बजे यास्मीन अपने शौहर के इंतजार में परेशान होकर शिव मंदिर के व्यवस्थापक से मदद मांगने के लिए पहुंच गई थीं। धीरज बताते हैं कि तब उनका पीसीओ था और मोबाइल की सुविधा नहीं थी।
यास्मीन काम पर गए अपने शौहर के घर न लौटने की वजह से चिंतित थीं। धीरज ने रात को पीसीओ खोलकर यास्मीन की उनके शौहर से न सिर्फ बात कराई, बल्कि उनको घर तक सुरक्षित पहुंचाया भी। इसी के बाद से यास्मीन धीरज को अपना भाई मानने लगीं। तभी से यास्मीन हर वर्ष धीरज को राखी बांधती रहीं, लेकिन पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी जान चली गई। इस बार रक्षाबंधन पर धीरज ने शंभूनाथ मंदिर में भंडारा होने की व्यस्तता के बावजूद उसी मुहल्ले की सादमा को बहन बना लिया और उनके राखी बंधवा कर मिसाल पेश की।
बहनों ने दूसरे दिन भी भाइयों की कलाई पर बांधी नेह की डोर
रक्षाबंधन पर शुक्रवार को भी बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान बहनों ने आरती उतारकर भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और फिर नेह की डोर कलाई पर सजाई। इस बार रक्षाबंधन पर बृहस्पतिवार को बहनें थाल सजाकर दिन भर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार करती रहीं। भद्रा होने की वजह से दिन में राखी नहीं बांधी जा सकी। शुक्रवार की सुबह से ही राखी बांधने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान भाइयों ने तरह-तरह के उपहार बहनों को दिए।