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इलाहाबाद विवि में रैगिंग साबित, सात छात्र निष्कासित
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Ragging proved in Allahabad University, seven students expelled
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की एंटी रैगिंग कमेटी ने एसएसएल हॉस्टल में रैगिंग के मामले में सात छात्रों को दोषी मानते हुए उन्हें विश्वविद्यालय से एक सत्र के लिए निष्कासित कर दिया है। साथ ही भविष्य में विश्वविद्यालय के किसी भी हॉस्टल में प्रवेश के लिए अपात्र घोषित कर दिया है। यह निर्णय बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की अध्यक्षता में हुई एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में लिया गया।
एसएसएल हॉस्टल के बीए तृतीय वर्ष के छात्र आदित्य सिंह, विशाल यादव, नीलेश कुमार अग्रहरि, आनंद कौशल एवं उत्तम त्रिपाठी और बीए तृतीय वर्ष के छात्र अवनीश यादव एवं संजय पाल पर आरोप था कि वह स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को रात के वक्त छत पर ले गए और उन्हें मुर्गा बनाया। उनके साथ गालीगलौज भी की और उन्हें भी गालियां देने के लिए मजबूर किया। शिकायत मिलने के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने सातों आरोपी छात्रों को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से निष्कासित कर दिया था और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।
आरोपी छात्रों की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को यह मामला एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में प्रस्तुत किया गया। कमेटी ने नवप्रवेशित छात्रों की ओर से दिए गए शिकायती पत्र और आरोपी छात्रों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर गहन विचार-विमर्श किया। रैगिंग के नियमों के तहत सातों छात्रों को दोषी पाया गया। दोष सिद्ध होने पर रैगिंग के रेगुलेशन के अनुसार आरोपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एसएसएल हॉस्टल के छात्र के रूप में उनका प्रवेश निरस्त कर दिया गया।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में उन्हें सत्र 2019-20 के लिए निष्कासित करते हुए भविष्य में विश्वविद्यालय के किसी भी छात्रावास में प्रवेश के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया। कमेटी के निर्णय के बाद चीफ प्रॉक्टर की ओर से सभी आरोपी छात्रों को आदेश की प्रति जारी करते हुए कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। साथ ही आरोपी छात्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस आदेश का पूरी तरह से अनुपालन करेंगे।
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एसएसएल हॉस्टल के बीए तृतीय वर्ष के छात्र आदित्य सिंह, विशाल यादव, नीलेश कुमार अग्रहरि, आनंद कौशल एवं उत्तम त्रिपाठी और बीए तृतीय वर्ष के छात्र अवनीश यादव एवं संजय पाल पर आरोप था कि वह स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को रात के वक्त छत पर ले गए और उन्हें मुर्गा बनाया। उनके साथ गालीगलौज भी की और उन्हें भी गालियां देने के लिए मजबूर किया। शिकायत मिलने के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने सातों आरोपी छात्रों को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से निष्कासित कर दिया था और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।
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आरोपी छात्रों की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को यह मामला एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में प्रस्तुत किया गया। कमेटी ने नवप्रवेशित छात्रों की ओर से दिए गए शिकायती पत्र और आरोपी छात्रों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर गहन विचार-विमर्श किया। रैगिंग के नियमों के तहत सातों छात्रों को दोषी पाया गया। दोष सिद्ध होने पर रैगिंग के रेगुलेशन के अनुसार आरोपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एसएसएल हॉस्टल के छात्र के रूप में उनका प्रवेश निरस्त कर दिया गया।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में उन्हें सत्र 2019-20 के लिए निष्कासित करते हुए भविष्य में विश्वविद्यालय के किसी भी छात्रावास में प्रवेश के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया। कमेटी के निर्णय के बाद चीफ प्रॉक्टर की ओर से सभी आरोपी छात्रों को आदेश की प्रति जारी करते हुए कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। साथ ही आरोपी छात्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस आदेश का पूरी तरह से अनुपालन करेंगे।