UPPSC : असिस्टेंट प्रोफेसर की सीधी भर्ती पर उठे सवाल, लिखित परीक्षा से भर्ती के लिए अड़े प्रतियोगी छात्र
प्रतियोगियों का कहना है कि लिखित परीक्षा से चयन होने के कारण यह भर्ती प्रदेश में निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा की प्रतीक बनी। इंटरव्यू के महत्व को कम करके परंपरागत लिखित परीक्षा से प्रदेश को योग्य व प्रतिभाशाली प्रवक्ता मिले।
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प्रदेश के राजकीय डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में हैं। प्रतियोगियों ने सवाल उठाए हैं कि जब अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से भर्ती होती है तो राजकीय डिग्री कॉलेज में सीधी भर्ती क्यों हो रही है। छात्र चाहते हैं कि राजकीय डिग्री कॉलेजों में भी परीक्षा के माध्यम से भर्ती हो।
इससे पूर्व प्रवक्ता जीआईसी के पदों पर भी सीधी भर्ती होती थी, लेकिन वर्ष 2020 में जारी विज्ञापन के तहत पहली बार प्रारंभिक और लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती कराई गई। प्रतियोगियों का कहना है कि लिखित परीक्षा से चयन होने के कारण यह भर्ती प्रदेश में निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा की प्रतीक बनी।
इंटरव्यू के महत्व को कम करके परंपरागत लिखित परीक्षा से प्रदेश को योग्य व प्रतिभाशाली प्रवक्ता मिले।ऐसे में राजकीय डिग्री कॉलेजों में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के आधार पर होनी चाहिए। उधर, राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने पिछले दिनों कॉलेजों से रिक्त पदों का ब्योरा मांगा था।
राजकीय डिग्री कॉलेजों में होनी है 2415 पदों पर भर्ती
कॉलेजों ने जो जानकारी दी, उसके अनुसार राजकीय डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 3160 पद सृजित हैं। 2415 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं और 745 पद रिक्त हैं। अब इन रिक्त पदों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती होनी है। आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती करता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सीधे इंटरव्यू से भर्ती होने पर भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
अशासकीय डिग्री कॉलेजों में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती होती है, लेकिन इसके लिए लिखित परीक्षा कराई जाती है और इसके बाद इंटरव्यू होते हैं। प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, अपर मुख्य सचिव, यूपी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि राजकीय डिग्री कॉलेजों में भी लिखित परीक्षा के माध्यम से भर्ती कराई जाए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने भी सीएम को पत्र लिखकर प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के माध्यम से भर्ती कराने की मांग की है।