पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ बोले : प्राइवेट स्कूल कॉलेज तो खुले लेकिन किसी ने नहीं की गुरुकुल खोलने की कोशिश
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 90 करोड़ सनातनियों के देश में धीरे-धीरे बढ़ रही है नाम बदलने की प्रक्रिया।
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सनातन एकता मिशन की ओर से प्रयाग संगीत समिति में ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में सनातन मूल्यों की महत्ता’ विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार और वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दुनिया हमें 1947 से नहीं, बल्कि हजारों वर्ष पहले से जानती है। मैकाले कोई शिक्षाविद नहीं था। उसके जाने के बाद भी देश में 80 फीसदी गुरुकुल थे, लेकिन अब दिल पर हाथ रखकर बताइए कि प्राइवेट स्कूल-कालेज तो खुले लेकिन किसी ने गुरुकुल खोलने की कोशिश की।
प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षागृह में आयोजित सेमिनार में पुष्पेंद्र ने कहा कि स्कूल में सरकार क्या पढ़ाती है, क्या नहीं, हम इसी चिंता में मग्न हैं, लेकिन हमने घर पर बच्चों को क्या पढ़ाया यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। पुष्पेंद्र ने कहा कि अकबर ने इस शहर का नाम प्रयाग से अल्लाहबाद रखा। अकबर ने ही दीन-ए-इलाही धर्म शुरू किया था, लेकिन सही मायनों में उसने दीन-ए-तबाही मचाई थी।
लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है
हमको इसे समझने में इतना समय लगा। 90 करोड़ सनातनियों के देश में नाम बदलने की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इसके पूर्व सनातन एकता मिशन की ओर से कहा गया कि हिंदुओं को अपनी संख्या का एहसास सरकार को कराना होगा। 90 करोड़ की बहुसंख्यक जनता समान नागरिक अधिकारों की भीख मांग रही है और कुछ उन्मादी लोग अपने विशेष नागरिक अधिकारों का आनंद ले रहे हैं, जबकि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने की। इस अवसर पर सनातन एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार पाठक, महासचिव विपुलेश त्रिपाठी, देवराज पाठक, राजेंद्र पांडेय, सीताशरण शास्त्री, सहदेवी मुखर्जी, नीरज दीक्षित, इंद्रमणि पांडेय, अनूप त्रिपाठी, आदित्य पाठक आदि मौजूद रहे।