प्रयागराज : अभियोजन 25 साल बाद भी पेश न कर सका गवाह, आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा- अनंतकाल तक नहीं चला सकते केस
सोमवार को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने पाया कि मामला 1997 से लंबित है। अभियोजन पक्ष को साक्ष्य और गवाह पेश करने का मौका दिया जा रहा है, इसके बावजूद साक्ष्य नहीं पेश किए जा सके। आखिरकार कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश दे दिया।
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जिला अदालत ने 25 साल पुराने आपराधिक मुकदमे का निपटारा करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अनंतकाल तक आपराधिक मुकदमा लंबित नहीं रखा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने 25 साल पुराने मामले में एक ही परिवार के पांच आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
यह आदेश जनपद न्यायालय की विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने दारागंज थानाक्षेत्र में घर का ताला तोड़कर जबरन कब्जा करने के आरोप में दर्ज मामले का निस्तारण करते हुए दिया। वर्ष 1997 में बक्शी खुर्द दारागंज निवासी गंगाधर दुबे ने अपने सगे भाई कृष्ण दुबे और अन्य परिवारीजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
आरोप लगाया था कि कृष्ण दुबे, लक्ष्मी शुक्ला, केशव त्रिपाठी और केशव के बेटे अनुराग त्रिपाठी, मयंक त्रिपाठी और रंजन त्रिपाठी ने उनके मकान के निचले हिस्से के कमरे का ताला तोड़कर जबरन कब्जा कर लिया। आरोपियों ने एक कमरे का सामान फेंक दिया और दूसरे कमरे में रखीं पूर्वजों द्वारा हस्तलिखित धार्मिक पुस्तकें गायब कर दीं।
एक आरोपी की हो चुकी है मौत
दारागंज पुलिस ने सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की विशेष अदालत ने मामले का विचारण शुरू कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोप सिद्ध करने के कई मौके दिए, लेकिन 25 साल में एक भी गवाह पेश नहीं किया जा सका। इस दौरान एक आरोपी केशव प्रसाद त्रिपाठी की मौत भी हो गई।
सोमवार को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने पाया कि मामला 1997 से लंबित है। अभियोजन पक्ष को साक्ष्य और गवाह पेश करने का मौका दिया जा रहा है, इसके बावजूद साक्ष्य नहीं पेश किए जा सके। आखिरकार कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश दे दिया।