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टीजीटी शिक्षिका को चयन से बाहर करने के आदेश पर रोक
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Prohibition on order to exclude TGT teacher from selection
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टीजीटी शिक्षिका को चयन से बाहर करने पर रोक
0 संशोधित परिणाम में कटऑफ से कम अंक आने पर कर दिया गया बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी संस्कृत 2013 में चयनित अध्यापिका को चयन से बाहर करने पर रोक लगा दी है तथा प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से जवाब मांगा है। चयन बोर्ड ने संशोधित परिणाम जारी करते हुए नया पैनल गठित किया, जिसमें पूर्व में चयनित अध्यापिका चयन से बाहर हो गई। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। बस्ती की साक्षी मिश्रा की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था चयन बोर्ड ने 2013 में टीजीटी संस्कृत के लिए विज्ञापन जारी किया। याची का उसमें चयन हो गया। उसे जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मझरिया बस्ती में नियुक्ति मिली। इस बीच संदीप कुमार मिश्र की ओर से दाखिल एक याचिका में परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों को चुनौती दी गई। बोर्ड ने स्वीकार कर लिया कि उन दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे। कोर्ट ने याची का परिणाम संशोधित करने और कटऑफ में आने पर नियुक्ति देने का आदेश दिया।
इस आदेश के बाद चयन बोर्ड ने पूरा परिणाम ही संशोधित कर दिया। संशोधित परिणाम में याची के अंक कटऑफ मेरिट से कम हो गए। बोर्ड ने 23 सितंबर 2019 को नया पैनल चयनित कर लिया और याची के विद्यालय में उसी के पद पर एक अन्य अभ्यर्थी को चयनित कर लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि इससे पूर्व हुए टीजीटी संस्कृत के चयन में भी यही विसंगति पैदा हुई थी, तब हाईकोर्ट ने पूर्व में चयनित लोगों को चयन से बाहर नहीं करने और संशोधित परिणाम से चयनित अभ्यर्थियों को अन्य रिक्ति पदों पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इस आदेश के आधार पर याची को चयन से बाहर करने के निर्णय पर रोक लगा दी है तथा जवाब मांगा है।
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0 संशोधित परिणाम में कटऑफ से कम अंक आने पर कर दिया गया बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी संस्कृत 2013 में चयनित अध्यापिका को चयन से बाहर करने पर रोक लगा दी है तथा प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से जवाब मांगा है। चयन बोर्ड ने संशोधित परिणाम जारी करते हुए नया पैनल गठित किया, जिसमें पूर्व में चयनित अध्यापिका चयन से बाहर हो गई। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। बस्ती की साक्षी मिश्रा की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था चयन बोर्ड ने 2013 में टीजीटी संस्कृत के लिए विज्ञापन जारी किया। याची का उसमें चयन हो गया। उसे जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मझरिया बस्ती में नियुक्ति मिली। इस बीच संदीप कुमार मिश्र की ओर से दाखिल एक याचिका में परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों को चुनौती दी गई। बोर्ड ने स्वीकार कर लिया कि उन दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे। कोर्ट ने याची का परिणाम संशोधित करने और कटऑफ में आने पर नियुक्ति देने का आदेश दिया।
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इस आदेश के बाद चयन बोर्ड ने पूरा परिणाम ही संशोधित कर दिया। संशोधित परिणाम में याची के अंक कटऑफ मेरिट से कम हो गए। बोर्ड ने 23 सितंबर 2019 को नया पैनल चयनित कर लिया और याची के विद्यालय में उसी के पद पर एक अन्य अभ्यर्थी को चयनित कर लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि इससे पूर्व हुए टीजीटी संस्कृत के चयन में भी यही विसंगति पैदा हुई थी, तब हाईकोर्ट ने पूर्व में चयनित लोगों को चयन से बाहर नहीं करने और संशोधित परिणाम से चयनित अभ्यर्थियों को अन्य रिक्ति पदों पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इस आदेश के आधार पर याची को चयन से बाहर करने के निर्णय पर रोक लगा दी है तथा जवाब मांगा है।
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