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Prayagraj : सरकारी कर्मचारियों पर एफआईआर की मांग के मामले में जांच का आदेश
Sat, 27 Jun 2026 02:19 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 27 Jun 2026 02:19 PM IST
सार
जिला अदालत ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर पैतृक संपत्ति के नामांतरण से जुड़े अभिलेख गायब करने, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए रिश्वत मांगने और धमकी देने के आरोपों से जुड़े प्रकरण में जांच का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला अदालत ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर पैतृक संपत्ति के नामांतरण से जुड़े अभिलेख गायब करने, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए रिश्वत मांगने और धमकी देने के आरोपों से जुड़े प्रकरण में जांच का आदेश दिया है। अदालत ने प्रयागराज के नगर आयुक्त और एसीपी कर्नलगंज को मामले की जांच कर 10 जुलाई तक आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने अल्लापुर निवासी ओम प्रकाश की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर दिया है।
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शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पैतृक मकानों के नामांतरण से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख नगर निगम से गायब कर दिए गए हैं। साथ ही 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके प्रत्यावेदन का दो माह में निस्तारण करने का जो आदेश दिया था, उसके अनुपालन के नाम पर जोनल अधिकारी ने रिश्वत की मांग की। विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया। उनके मुताबिक अभिलेख में उनकी बहनों के मूल अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), शपथपत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज संलग्न थे। इनके गायब होने से उन्हें संपत्ति संबंधी गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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अदालत ने कहा कि मामला सरकारी कर्मचारियों से संबंधित है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रारंभिक जांच आवश्यक है। अदालत ने नगर निगम के जोनल अधिकारी और लिपिक के संबंध में नगर आयुक्त और अन्य आरोपों के संबंध में एसीपी कर्नलगंज को जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को होगी।
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