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समाज का आईना हैं प्रेमचंद की रचनाएं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 01 Aug 2015 01:59 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शुक्रवार को विभिन्न सामाजिक, लेखक और छात्र संगठनों की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) एवं जनवादी लेखक संघ (जलेस) की ओर से साहित्य का उद्देश्य संदर्भ: प्रेमचंद्र विषयक गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता लाल बहादुर वर्मा ने कहा कि दुनिया के इतिहास में यह दर्ज है कि जब फांसीवाद का खतरा आया है तो लेखकों ने कलम छोड़कर हथियार उठाए हैं। प्रेमचंद्र ने पहली बार यह सवाल खड़ा किया कि क्या साहित्य राजनीति से पीछे चलेगा। अपना और अपने देश का संदर्भ जानना सबसे जरूरी है। प्रेमचंद की सभी रचनाएं समाज का आईना है।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो.अकील रिजवी ने कहा कि तहजीब के साथ समाज भी बदलता है। साहित्य को वक्त के साथ चलाना होगा जो कि नहीं हो रहा है। युवा कवि आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि हमने एक ऐसा साहित्यिक तंत्र विकसित कर लिया जो प्रतिपक्ष के प्रति असंवेदनशील है। प्रलेस अध्यक्ष प्रोपेसर संतोष भदौरिया ने आत्मप्रचार और आत्ममुग्धता की प्रवृत्ति से बाहर आने की बात कही। गोष्ठी का संचालन युवा कथाकार शिवानंद मिश्र और आभार ज्ञापन वरिष्ठ कथालेखिका नीलम शंकर ने किया। कार्यक्रम में जलेस अध्यक्ष हरिश्चंद्र पांडेय, कामरे़ड जियाउल हक, उर्मिला जैन, प्रो.अनीता गोपेश, असरार गांधी, अशफाक हुसैन, महेंद्रराजा जैन, श्रीप्रकाश मिश्र, एहतराम इस्लाम, नसीम अंसारी आदि मौजूद रहे।
वहीं गोविंद बल्लभ पंत संस्थान में जन अधिकार मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शोधछात्रों ने प्रेमचंद के साहित्य को अमूल्य वरदान बताया। बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार नीलकांत ने प्रेमचंद्र साहित्य का मर्म बताया। नेहरू ग्राम भारती में कुलपति जेएन मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य की विभिन्न विधाओं को अपनी लेखनी से समृद्ध किया। पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ.हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने मर्यादा, माधुरी, हंस, जागरण जैसे पत्रों के जरिए पत्रकारिता के क्षेत्र में नवीन मूल्यों की स्थापना की। जनवादी छात्र सभा की ओर से छात्र-किसानों की दुर्दशा और मुंशी प्रेमचंद विषय पर संगोष्ठी हुई।
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प्रतिबिंब संस्था की ओर से प्रेमचंद कृत ‘बौड़म’ का मंचन किया गया। सिद्धार्थ पाल के परिकल्पना एवं निर्देशन में कलाकारों ने उनकी रचना को जीवंत करने का प्रयास किया। नाटक में शुभम पांडेय, आकाश अग्रवाल, सुनील कुमार, शिवानी भारतीय, संदीप कुमार, लवकुश कुमार, संतोष साकेत, शेफाली सागर, अंकित तिवारी, प्रेम मिश्रा आदि ने अभिनय किया। मंजिल संस्था की ओर से मिंटो पार्क सरस्वती घाट पर ‘पूस की रात’ का मंचन अजित राज के निर्देशन में किया गया। नाटक में राजेश कुमार, नागेश पटवा, कंचन श्रीवास्तव, उत्कर्षित कुशवाहा, शिवम केसरवानी आदि ने अभिनय किया।
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कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो.अकील रिजवी ने कहा कि तहजीब के साथ समाज भी बदलता है। साहित्य को वक्त के साथ चलाना होगा जो कि नहीं हो रहा है। युवा कवि आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि हमने एक ऐसा साहित्यिक तंत्र विकसित कर लिया जो प्रतिपक्ष के प्रति असंवेदनशील है। प्रलेस अध्यक्ष प्रोपेसर संतोष भदौरिया ने आत्मप्रचार और आत्ममुग्धता की प्रवृत्ति से बाहर आने की बात कही। गोष्ठी का संचालन युवा कथाकार शिवानंद मिश्र और आभार ज्ञापन वरिष्ठ कथालेखिका नीलम शंकर ने किया। कार्यक्रम में जलेस अध्यक्ष हरिश्चंद्र पांडेय, कामरे़ड जियाउल हक, उर्मिला जैन, प्रो.अनीता गोपेश, असरार गांधी, अशफाक हुसैन, महेंद्रराजा जैन, श्रीप्रकाश मिश्र, एहतराम इस्लाम, नसीम अंसारी आदि मौजूद रहे।
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वहीं गोविंद बल्लभ पंत संस्थान में जन अधिकार मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शोधछात्रों ने प्रेमचंद के साहित्य को अमूल्य वरदान बताया। बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार नीलकांत ने प्रेमचंद्र साहित्य का मर्म बताया। नेहरू ग्राम भारती में कुलपति जेएन मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य की विभिन्न विधाओं को अपनी लेखनी से समृद्ध किया। पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ.हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने मर्यादा, माधुरी, हंस, जागरण जैसे पत्रों के जरिए पत्रकारिता के क्षेत्र में नवीन मूल्यों की स्थापना की। जनवादी छात्र सभा की ओर से छात्र-किसानों की दुर्दशा और मुंशी प्रेमचंद विषय पर संगोष्ठी हुई।
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प्रतिबिंब संस्था की ओर से प्रेमचंद कृत ‘बौड़म’ का मंचन किया गया। सिद्धार्थ पाल के परिकल्पना एवं निर्देशन में कलाकारों ने उनकी रचना को जीवंत करने का प्रयास किया। नाटक में शुभम पांडेय, आकाश अग्रवाल, सुनील कुमार, शिवानी भारतीय, संदीप कुमार, लवकुश कुमार, संतोष साकेत, शेफाली सागर, अंकित तिवारी, प्रेम मिश्रा आदि ने अभिनय किया। मंजिल संस्था की ओर से मिंटो पार्क सरस्वती घाट पर ‘पूस की रात’ का मंचन अजित राज के निर्देशन में किया गया। नाटक में राजेश कुमार, नागेश पटवा, कंचन श्रीवास्तव, उत्कर्षित कुशवाहा, शिवम केसरवानी आदि ने अभिनय किया।