प्रयागराज : जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की अधिसूचना जारी, भाजपा ने नहीं खोले पत्ते
चुनाव का कार्यक्रम
नामांकन - 26 जून दिन में 11 से तीन बजे के बीच
जांच - 26 जून को दिन में तीन बजे से
नाम वापसी - 29 जून को दिन में 11 से तीन बजे के बीच
मतदान - तीन जुलाई को दिन में 11 से तीन बजे तक
मतगणना - तीन जुलाई को तीन बजे के बाद
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विस्तार
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए डीएम संजय कुमार खत्री ने बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी। चुनाव की प्रक्रिया 26 जून को शुरू होगी। वहीं मतदान तीन जुलाई को होगा। उसी दिन परिणाम आने की उम्मीद है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव का कार्यक्रम मंगलवार को ही जारी कर दिया गया था। इसी क्रम में डीएम ने अधिसूचना जारी की। जिले में कुल 84 जिला पंचायत सदस्य हैं। सभी निर्वाचित सदस्यों की सूची भी बुधवार को फाइनल कर चस्पा कर दी गई। सूची कलक्ट्रेट के अलावा जिला पंचायत भवन तथा अन्य संबंधित कार्यालय पर लगाई गई है। इसके अलावा डाक के माध्यम से भी सदस्यों को चुनाव से अवगत कराया जाएगा।
भाजपा ने नहीं खोले पत्ते, खींचतान जारी
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है लेकिन भाजपा में समर्थित उम्मीदवार का नाम अभी तय नहीं हो पाया है। हालांकि एक दावेदार का नाम फाइनल माना जा रहा है। उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया है लेकिन एक अन्य दावेदार भी पार्टी के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि दावेदारों के नाम के साथ रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही समर्थित उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तरह-तरह के खेल सामने आ रहे हैं। कई सदस्यों के पास उनके निर्वाचन का प्रमाण पत्र ही नहीं है। किसी का प्रमाण पत्र ‘बाबूजी’ के पास है तो किसी का ‘दीदी’ ने ले लिया है। इससे दावेदारों की भी चुनौती बढ़ गई है। अब उनके सामने सदस्य के अलावा उनके राजनीतिक आकाओं को भी मनाने की चुनौती है।
जिला पंचायत चुनाव से पहले कई सदस्यों को बाहर के टूर पर जाना पड़ सकता है। वे सीधे मतदान के दिन लौटेंगे। उन्होंने इस आशय का शपथ पत्र भी बनवा लिया है। ताकि, उन्हें किसी तरह के विवाद का सामना न करना पड़े। इसी तरह से दबाव बनाने के लिए कई सदस्यों के प्रमाण पत्र भी ले लिए गए हैं। बुधवार को सदस्यों से संपर्क करने के लिए निकले एक दावेदार को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। दो सदस्य ने बताया कि उनका प्रमाण पत्र ‘बाबूजी’ के पास है और उनका निर्देश ही उन्हें मान्य होगा। इसी तरह से एक सदस्य ने कहा कि प्रमाण पत्र ‘दीदी’ के पास है। जिला पंचायत चुनाव से लंबे समय से जुड़े रहे एक नेता ने बताया कि सदस्य पर दबाव बनाने के लिए प्रमाण पत्र रखवा लिए जाते हैं। यदि दूसरे पाले में जाने की आशंका है तो उसका प्रमाण पत्र रखकर घर बैठने के लिए दबाव बनाया जाता है।