एमएलएन मेडिकल कॉलेज में एक्टिव क्वारंटीन की सुविधा नहीं, लैब तकनीशियनों ने जताई संक्रमण की आशंका
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में तैनात लैब तकनीशियनों ने एक्टिव क्वारंटीन न किए जाने पर आक्रोश है। उनका कहना है कि कोरोना मरीजों का स्वाब सैंपल लेने के साथ लैब में उसकी जांच कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके लिए एक्टिव क्वारंटीन की व्यवस्था नहीं की गई है। वे अपने घर जा रहे हैं। लिहाजा संक्रमण का खतरा है।
लैब तकनीशियनों का कहना है कि लैब में जांच करने के लिए जिले के साथ दूसरों जिलों से भी नमूने आ रहे हैं। अब तो कई पॉजिटिव केस भी सामने आ गए हैं, लेकिन मेडिकल प्रशासन की ओर से एक्टिव क्वारंटीन की व्यवस्था नहीं की गई है। काम खत्म करने के बाद उन्हें अपने घर जाना पड़ रहा है। ऐसे मेें उन्हें तो संक्रमण का खतरा है ही उनके परिवार के सदस्यों को भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। लैब तकनीशियनों ने कहा कि उन्होंने इसके लिए कई बार विभागाध्यक्ष और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से कहा लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
उधर, मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्क्ष डॉ. मोनिका और कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. सुजीत कुमार का कहना है कि अभी इस संबंध में शासन का कोई निर्देश नहीं आया है। उनका यह भी तक है कि लैब में काम कर रहे तकनीशियन सीधे मरीजों के संपर्क में नहीं आते हैं और उन्हें लैब में पूरे प्रोटेक्शन के साथ जाना होता है। इसलिए उन्हें वार्ड में काम करने वालों के मुकाबले खतरा कम हैं। जवाब में लैब में काम कर रहे तकनीशियन और अन्य अन्य कर्मचारियों का कहना है कि मरीजों का स्वाब सैंपल लेने के दौरान वे मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं और लैब में भी काम करने के दौराना इसके संक्रमण की आशंका हैं। इसलिए यह कहना गलत है कि वे कम जोखिम में काम कर रहे हैं।
कोटवां बनी स्थित कोविड-19 लेवल-1 हॉस्पिटल में रखे गए लैब तकनीशियनों को हफ्ते भर ड्यूटी के दौरान एक्टिव क्वारंटीन में रखा गया और उसके बाद 14 दिनों तक पैसिव क्वारंटीन में रखने के बाद घर भेजा गया। शासन की ओर से यही गाइडलाइन जारी की गई है। मेडिकल कॉलेज के लिए कोई अलग से गाइडलाइन नहीं है।
बीएसएल-3 लैब में जाते ही नहीं फैकेल्टी मेंबर !
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग में जांच शुरू हुए महीने भर होने को हैं। कहा जा रहा है कि विभाग के फैकेल्टी मेंबर शुरूआती के एक-दो दिनों को छोड़कर बीएसएल-3 लैब में जाते ही नहीं हैं। उनकी भूमिका कोरोना की जांच में लगने वाली सामग्रियों को मंगाने, उसके लिए कागज तैयार करने, जांच का डाटा एकत्र करने और रिपोर्ट को मेडिकल प्रशासन तक उपलब्ध कराने तक सीमित है।विभाग के सूत्र बताते हैं कि बीएसएल-3 लैब में तो कोई नहीं जाता है। जबकि कोरोना की जांच का पहला राउंड यहीं होता है। कभी-कदा एकांत बार सेकेंड राउंड की जांच देखने के लिए एक फैकेल्टी मेंबर चले जाते हैं, लेकिन उसका समय बहुत ही कम होता है। विभाग में तीन फैकेल्टी मेंबर हैं। नौ तकनीशियन, दो डिमांस्टेटर, चार नान पीजी सदस्य हैं। इस संबंध में डॉ. रीना सचान से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से ही बात करें। वह बात नहीं करेंगी।