प्रयागराज : सेना की बस पलटने से शहीद हुआ जिले का सपूत
बुधवार को शाम सेना के वाहन से ड्यूटी के दौरान कहीं जाते समय सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें मनीष शहीद हो गए। शाम तकरीबन सात बजे सेना द्वारा फोन से घर पर सूचना मिली तो कोहराम मच गया।
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हनुमानगंज के रहने वाले नायक मनीष पांडेय की बुधवार को जम्मू कश्मीर के ऊधमपुर में हुए सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसे की खबर उसके घर पहुंची तो कोहराम मच गया। परिजन और ग्रामीण मनीष को याद कर बिलखते रहे। शुक्रवार को मनीष का शव गांव पहुंचने की संभावना है।
बेलवार जमुनीपुर गांव निवासी मनीष पांडेय पुत्र नरेंद्र कुमार पांडेय सेना में नायक के पद पर 10 इब्ल्यू फील्ड वर्कशाप (सिग्नल यूनिट) ऊधमपुर, जम्मू कश्मीर में तैनात थे। बुधवार की शाम सेना की गाड़ी से ड्यूटी के लिए जाते वक्त रास्ते में अचानक गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया।
इस दौरान बेकाबू हुआ वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें मनीष की मौत हो गई। हादसे में वाहन चालक भी गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। बुधवार की शाम तकरीबन सात बजे मनीष के निधन की खबर सेना ने घर पर दी तो कोहराम मच गया। मां आशा पांडेय और शिल्पी बेसुध हो गईं थी।
पिता नरेंद्र के आंसू नहीं रुक रहे थे। पांच साल का बड़ा बेटा श्रेयांश और तीन साल का वेदांश, सबको रोते देख मासूमियत से पूछ रहे थे कि पापा कब आएंगे। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे।
बृहस्पतिवार को दिन भर सांत्वना देने वालों को तांता लगा रहा। मनीष जनवरी की शुरुआत में ही घर आ गए थे। चार फरवरी को वह वापस ड्यूटी पर लौटे थे। सेना के अधिकारियों ने घर वालों को बताया है कि उनका शव ऊधमपुर में लाया गया है। यहां पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को शव पैत्रिक गांव पहुंचने की संभावना है।
फोन आते ही परिजन रह गए थे हक्के बक्के
बुधवार की शाम जब मनीष के घर सेना के अधिकारियों ने फोन कर जानकारी दी तो परिजन हक्के बक्के रह गए। उन्होंने तुरंत मनीष के चचेरे भाई कैप्टन सुधांशु पांडेय को फोन पूरी बात पता लगाने को कहा। कैप्टन सुधांशु इस समय पुणे में तैनात हैं। उन्होंने ऊधमपुर फोन कर पूरी जानकारी ली और घर वालों को मनीष के मौत की पुष्टि की।
हादसे से कुछ घंटे पहले किया था फोन, कहा था जल्द आऊंगा
मनीष पांडेय ने हादसे से कुछ घंटे पहले ही पत्नी शिल्पी को फोन किया था। उनसे कहा था कि बऽाों और माता पिता का ख्याल रखना। मैं जल्द आऊंगा। उन्होंने दोनों बऽाों के बारे में भी पूछा था कि दोनों क्या कर रहे हैं। शाम को जब सेना के अधिकारियों ने फोन कर बताया कि मनीष शहीद हो गए तो शिल्पी पर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा।