Prayagraj Police : पुख्ता पैरवी से अपराध पर शिकंजा, 245 को दिलाई सजा, शातिर अपराधियों को कर रहे चिन्हित
पुलिस अफसरों का मानना है कि अपराध पर शिकंजा महज एफआईआर और गिरफ्तारी से संभव नहीं है। यह भी जरूरी है कि दोषियों को सजा दिलाई जाए। सुनिश्चित किया जाए कि अपराध करने वाले सलाखों के पीछे ही रहें।
विस्तार
अतीक अहमद ने पहला अपराध 1979 में किया। इसके बाद लगातार 43 सालों तक वह वारदातें करता रहा, लेकिन उसे एक भी मुकदमे में सजा नहीं हुई। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों में प्रभावी पैरवी न होना इसकी सबसे बड़ी वजह रही। फिलहाल अतीक के खात्मे के बाद अब कोई दूसरा माफिया न पनपे, इसके लिए कमिश्नरेट पुलिस अभियोजन से अपराध पर शिकंजा कसने में जुटी हुई है। इसके तहत पिछले छह महीनों में 193 गंभीर मामलों में 245 अपराधियों को सजा दिलाई जा चुकी है।
पुलिस अफसरों का मानना है कि अपराध पर शिकंजा महज एफआईआर और गिरफ्तारी से संभव नहीं है। यह भी जरूरी है कि दोषियों को सजा दिलाई जाए। सुनिश्चित किया जाए कि अपराध करने वाले सलाखों के पीछे ही रहें। इसी के तहत अभियोजन से अपराध पर शिकंजा अभियान शुरू किया गया। इसमें सबसे पहले गंभीर मुकदमों को चिह्नित किया गया। इनमें हत्या, दुष्कर्म, लूट, पॉक्सो, गोवध, लव जिहाद व फिरौती के लिए अपहरण के मामले शामिल रहे। तीनों जाेन को मिलाकर कुल 370 ऐसे मामले चिह्नित किए गए, जिनमें अभियुक्तों को अधिकतम सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया।
जुलाई से लेकर अब तक इनमें से 193 अभियोगों में अभियुक्तों पर दोषसिद्ध कराया जा चुका है। इन मामलों में कुल 245 लोगों को सजा दिलवाई गई। छह महीने में ही लगभग 200 मामलों में 200 से ज्यादा अभियुक्तों को दोष सिद्ध कराना प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके लिए लखनऊ स्थित मुख्यालय के अफसरों ने पुलिस आयुक्त रमित शर्मा को प्रमाणपत्र प्रदान करने का निर्णय भी लिया है।
ऐसे बदली व्यवस्था, दिखने लगा परिणाम
एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र ने बताया कि प्रभावी अभियाेजन के लिए तमाम पहल की गईं। इसके लिए मॉनिटरिंग सेल का गठन हुआ। सेल के सदस्य यह सुनिश्चित करते हैं कि चिह्नित मुकदमों में प्रभावी पैरवी में कोई कमी न रह जाए। चिह्नित मुकदमों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग होती है और सेल के कर्मचारी सुनवाई की तिथि आते ही संबंधित थाने को सूचित करते हैं। यही नहीं सेल में तैनात कर्मचारी यह भी पता लगाते हैं कि संबंधित कोर्ट में पैरवी की गई या नहीं। गवाही होनी है तो गवाह हाजिर हुआ या नहीं। इससे थाना पुलिस भी पैरवी को लेकर अलर्ट रहती है।
किसे कितनी सजा
27 मुकदमों में 39 अभियुक्तों को आजीवन कारावास
दो मुकदमों में दो अभियुक्तों को 20 साल की सजा
12 मुकदमों में 14 अभियुक्तों को 10 साल की सजा
12 मुकदमों में 17 अभियुक्तों को पांच से नौ साल की सजा
139 मुकदमों में 174 अभियुक्तों को दो से पांच वर्ष की सजा