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प्रयागराज माघ मेला : एडीजी, आईजी और डीआईजी ने माघमेले में किया भूमि पूजन 

Sun, 21 Nov 2021 11:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 21 Nov 2021 11:20 PM IST
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Prayagraj Magh Mela: ADG, IG and DIG performed Bhoomi Pujan in Magh Mela
prayagraj news : माघ मेला - फोटो : prayagraj

आने वाले माघमेले के लिए रविवार को पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने संगम पर भूमि पूजन किया। एडीजी प्रेम प्रकाश, आईजी राकेश सिंह और डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने संगम पर भूमि पूजन किया और मां गंगा से मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए आशीर्वाद मांगा। इस दौरान प्रशासन के भी अधिकारी मौजूद रहे।

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दलदल में फंसी संगम पर माघ मेला बसाने की तैयारी

संगम की रेती पर संतों-भक्तों के समागम के रूप में बसने वाले माघ मेले की तैयारियां इस बार पिछड़ गई हैं। जिस तरह गंगा तटों पर दलदल से हालात हैं, उससे लगता है कि चालू महीने में माघ मेला बसाने का काम शुरू नहीं हो सकेगा। ऐसे में मेला प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। माघ मेला 14 जनवरी को मकर संक्रांति के स्नान पर्व से आरंभ होगा।
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नवंबर का पहला पखवारा बीतने वाला है, लेकिन अभी तक मेला बसाने के लिए रेती पर भूमि समतल कराने का भी काम शुरू नहीं हो सका है। सेक्टर दो, तीन और चार में जहां मेला बसता है, वहां अभी पानी लगा हुआ है। छठ पूजा के लिए संगम पर महज दो सौ मीटर एरिया को ही अभी तक समतल कराया जा सका है। ऐसे में पांच सेक्टर में मेला बसाने को लेकर संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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इस बार भी दो हजार से अधिक समितियों और संतों-भक्तों के खालसों के अलावा पांच लाख से अधिक कल्पवासियों का जमावड़ा संगम तट पर लगेगा। ऐसे में अभी तक तैयारियों के नाम पर कुछ भी न हो पाना, हर किसी के लिए मुसीबत पैदा करने वाला है। गंगा पर सात पांटून पुलों के लिए टेंडर होने के बाद भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारी रोज गंगा की रेती सूखने की बाट जोह रहे हैं।

पीडब्ल्यूडी के मेला डिवीजन से जुड़े अफसरों का कहना है कि जिस तरह इस बार की विकट परिस्थिति है, उससे नहीं लगता कि नवंबर में पांटून पुलों का निर्माण आरंभ हो पाएगा। दिसंबर में काम शुरू भी होता है, तो महीने भर के भीतर सात पुलों को बनाकर देना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा। इसी तरह दो सौ किमी से अधिक चकर्ड प्लेट मार्गों का भी निर्माण होना है। इसके अलावा विद्युतीकरण को लेकर भी संकट बना हुआ है।


जब तक मेला क्षेत्र का सर्वे नहीं हो जाता और बसाहट की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बिजली के तार-खंभे खींचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि एक्सईएन मेला बीके सक्सेना लगातार अपनी टीम के साथ मेला क्षेत्र का सर्वे कर रहे हैं, ताकि सूखे क्षेत्रों में काम शुरू कराया जा सके। इसी तरह इस बार मेला क्षेत्र में पेयजल लाइनों को बिछाना भी आसान नहीं होगा। जल निगम को सेक्टरवाइज एरिया जब तक चिह्नित करके नहीं दी जाएगी, तब तक पाइप लाइनों को बिछाने का काम शुरू नहीं हो सकता। ऐसे में मेले की तैयारियों को लेकर अफसरों के माथे पर पसीना चूने लगा है।

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