फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: Lives of 30 patients suffering from heart attack and cardiac arrest saved without ICU

Prayagraj :  बिना आईसीयू के हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के 30 मरीजों की बचाई जान

Thu, 15 Jan 2026 08:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Jan 2026 08:32 PM IST
सार

मेला क्षेत्र स्थित त्रिवेणी अस्पताल में आईसीयू के बिना हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मरीजों की जान सटीक उपचार प्रबंधन के बलबूते बचाई गई है। अस्पताल में मौजूद चार बेड के ट्रायज रूम को आईसीयू स्तर पर तैयार किया गया है।

विज्ञापन
Prayagraj: Lives of 30 patients suffering from heart attack and cardiac arrest saved without ICU
डॉ. राजेश श्रीवास्तव, हृदय रोग विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

Prayagraj :  बिना आईसीयू के हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के 30 मरीजों की बचाई जान
विज्ञापन

मेला क्षेत्र स्थित त्रिवेणी अस्पताल में आईसीयू के बिना हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मरीजों की जान सटीक उपचार प्रबंधन के बलबूते बचाई गई है। अस्पताल में मौजूद चार बेड के ट्रायज रूम को आईसीयू स्तर पर तैयार किया गया है। यहां पर अब तक हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट के 30 मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।

मेले में कल्पवास करने वाले कई लोग अपनी बीपी, शुगर व हृदय रोग की दवा लेने में लापरवाही करने लगते हैं। कई लोग व्रत के कारण भी दवा छोड़ देते हैं। इसके चलते हर साल माघ मेले में हृदय रोग व सांस के मरीज सामने आते हैं। वहीं, इस साल सर्दी का प्रकोप भी काफी रहा। ऐसे में मेला क्षेत्र स्थित त्रिवेणी अस्पताल में हार्ट अटैक और कॉर्डियेक अरेस्ट के रोजाना लगभग एक से दो मरीज आ रहे हैं। 
विज्ञापन


रायबरेली के एमडी मेडिसिन डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने अस्पताल में मौजूद ट्रायज रूम में सटीक उपचार प्रबंधन कर रखा है। अगर कोई हृदय व सांस का गंभीर रोगी आता है तो उसे भर्ती कर ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाता है। इसके बाद मरीज की ईसीजी जांच की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि होने पर सीपीआर व डिफिब्रिलेटर मशीन का उपयोग किया जाता है। इसके बाद मरीज को जीवन रक्षक इंजेक्शन दिए जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया मात्र चार से पांच मिनट के भीतर पूरी की जाती है। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर मरीज को एसआरएन अस्पताल रेफर किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed