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Prayagraj Flood News: आजादी के बाद 14वीं बार आई संगमनगरी में बाढ़, वर्ष 1978 के सितंबर माह में बना था रिकाॅर्ड

Wed, 06 Aug 2025 03:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 Aug 2025 03:11 PM IST
सार

आजादी के बाद से जिले में चौदहवीं बार बाढ़ आई है। सदी की सबसे बड़ी बाढ़ 1978 के माह सितंबर में आई थी। इसमें गंगा का जलस्तर 88.390 मीटर और यमुना का जलस्तर नैनी में 87.990 मीटर तक पहुंच गया था।

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Prayagraj Flood News: Sangam city is flooded for the 14th time since independence
बाढ़ के पानी में डूबा संगम स्थित बडे़ हनुमान मंदिर का परिसर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आजादी के बाद से जिले में चौदहवीं बार बाढ़ आई है। सदी की सबसे बड़ी बाढ़ 1978 के माह सितंबर में आई थी। इसमें गंगा का जलस्तर 88.390 मीटर और यमुना का जलस्तर नैनी में 87.990 मीटर तक पहुंच गया था। बाढ़ से 251 गांव पूर्ण रूप से घिर गए थे। यमुना बैंक रोड से यमुना नदी का पानी नगर क्षेत्र में प्रवेश करने लगा था और बक्शी बांध में भी रिसाव शुरू हो गया था।

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आजादी के बाद जिले में पहली बार बाढ़ वर्ष 1948 में आई थी। इसके बाद वर्ष 1956, वर्ष 1967, वर्ष 1971, वर्ष 1978, वर्ष 1983 में आई। इसके बाद वर्ष 2001, वर्ष 2013, वर्ष 2016, वर्ष 2019, वर्ष 2020, वर्ष 2021, वर्ष 2022 में भी बाढ़ का प्रकोप जिला झेल चुका है। 1978 के बाद 2013 में सबसे बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान हुआ था। उस दौरान गंगा का जलस्तर 86.820 और यमुना का जलस्तर 86.600 मीटर तक पहुंच गया था। इसमें जिले की सात तहसीलों के 233 गांव प्रभावित हुए थे। इस वर्ष आई बाढ़ में गंगा नदी का जलस्तर फाफामऊ में 86.11 मीटर पहुंच गया है जबकि यमुना का जलस्तर नैनी में 86.12 मीटर के करीब है। इस तरह से गौर करें तो वर्ष 2013 के आंकड़े के करीब दोनों नदियों का जलस्तर पहुंच गया है।

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जिले में औसत वर्षा की स्थिति

जिले की औसत वर्षा 976.40 मिमी प्रतिवर्ष है। इसमें लगभग 875 मिमी वर्षा माह जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में होती है। जिले में बाढ़ की समस्या गंगा , यमुना नदियों के कारण आती हैं। इसके अलावा टोन्स, बेलन, वरूणा, मनसौता, ससुर खदेरी आदि नदियां भी हैं।

बाढ़ से आठ तहसीलों के सैकड़ों हुए प्रभावित

बाढ़ से प्रभावित गांवों पर गौर करें तो सदर, सोरांव, फूलपुर, हण्डिया , करछना , बारा, मेजा, कोरांव तहसील क्षेत्र के एक हजार से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। इसमें सबसे अधिक फूलपुर के 150 से अधिक गांव हैं। हालांकि प्रशासन के आंकड़े कम ही गांवों को प्रभावित की श्रेणी में मान रहे हैं।

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