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Prayagraj Flood : बाढ़ की भेंट चढ़ीं दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा में बोई गईं फसलें, आकलन के लिए टीम गठित

Thu, 07 Aug 2025 05:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 07 Aug 2025 05:21 PM IST
सार

कृषि विभाग के अनुसार गंगा, यमुना की बाढ़ में दो हजार से अधिक हेक्टेयर में बोई गईं धान और सब्जी की फसलों को नुकसान होने का अनुमान है। जब भी बाढ़ आती है तो किसानों की फसलें चौपट हो जाती हैं।

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Prayagraj Flood: Crops sown in more than two thousand hectares were destroyed by the flood
बारा के पिपराव सहित कई गांव में पानी में डूबी धान की फसल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कृषि विभाग के अनुसार गंगा, यमुना की बाढ़ में दो हजार से अधिक हेक्टेयर में बोई गईं धान और सब्जी की फसलों को नुकसान होने का अनुमान है। जब भी बाढ़ आती है तो किसानों की फसलें चौपट हो जाती हैं। इस बार बाढ़ की चपेट में करीब 290 गांव हैं। ऐसे में दो हजार से ज्यादा किसानों द्वारा बोई गईं फसलें बर्बाद होने का अनुमान है। उधर डीएम ने जिले की सभी तहसीलों में किसानों की फसलों की क्षति के आकलन के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

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जिले में गंगा, यमुना दो मुख्य नदियां हैं। इसके अलावा टोंस, बेलन, वरुणा, मनसैता, ससुरखदेरी आदि नदियां हैं। बाढ़ की समस्या मुख्यत: गंगा और यमुना के कारण आती है। इन नदियों में अन्य सहायक नदियाें से पानी आ जाने से जलस्तर में सामान्य से अधिक तेजी से वृद्धि होती है जिससे बाढ़ आती है।
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वर्ष 1978 में 1075 गांव हुए थे प्रभावित, 78 करोड़ की फसलें हुई थीं बर्बाद

प्रयागराज। वर्ष 1978 में आई बाढ़ में 1075 गांव प्रभावित हुए थे और करीब 1,24,412 हेक्टेयर में बोई गईं फसलों को नुकसान हुआ था। 5023 भवन भी क्षतिग्रस्त हुए थे। उस समय कुल अनुमानित क्षति 78 करोड़ 21 लाख रुपये आंकी गई थी। वर्ष 2013 में 233 गांव और 59 मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। करीब आठ हजार हेक्टेयर में बोई गईं फसलें नष्ट हो गई थीं।
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जिले के सभी तहसीलों में किसानों की धान व सब्जियों की फसलें बर्बाद हुई हैं। टीमें गठित कर क्षति का आकलन कराने का निर्देश सभी एसडीएम को दिया गया है। कितने हेक्टेयर में बोई गईं फसलें बर्बाद हुई हैं यह आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। - मनीष कुमार वर्मा, डीएम

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