प्रयागराज : गंगा में बहे मजदूर की पत्नी को मिलेगी आठ लाख रुपये की मदद
पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार और अभियंताओं ने मिलकर दिए चार लाख नगद, चार लाख आपदा राहत कोष से मिलेंगे। पुत्रियों को कन्या विवाह और कन्या सुमंगल योजनाओं का भी मिलेगा लाभ, प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पांटून पुल निर्माण के दौरान गंगा में बहे मजदूर की मौत के बाद उसकी पत्नी को आठ लाख रुपये की नगद धनराशि मुआवजे के तौर पर दी जाएगी। इसमें चार लाख रुपये पीडब्ल्यूडी की ओर से दे दिए गए हैं। जबकि, चार लाख रुपये आपदा राहत कोष से महीने भर के भीतर दिलाने का प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया है। इसके अलावा उसे पेंशन योजना के साथ ही दो पुत्रियों को कन्या सुमंगल योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।
दो दिन पहले 14 दिसंबर को पांटून पुल संख्या-चार गंगोली शिवाला पर पीपा जोड़ते समय झूंसी निवासी अरुण निषाद उर्फ लल्लू फिसलकर गंगा में गिर कर बह गया। बृहस्पतिवार को भी उसका शव नहीं मिल सका। इस बीच घटना के विरोध में मजदूरों की नाराजगी सामने आने के बाद मेला प्रशासन और कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी ने गंगा में बहे मजदूर अरुण की आश्रित पत्नी गुंजन निषाद को आठ लाख रुपये की नगर धनराशि मुआवजा के तौर पर दिलाने का भरोसा दिलाया गया है।
ठेकेदार मनीष यादव बब्लू ने दो लाख और पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने दो लाख रुपये मिलाकर चार लाख रुपये गुंजन के नगद दिए हैं। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट ने महीने भर के भीतर चार लाख रुपये आपदा राहत कोष से दिलाने के लिए लिखित आश्वासन दिया है।
पुत्रियों के नाम अभियंता कराएंगे एक-एक लाख की एफडी
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता सत्येंद्र नाथ के मुताबिक गंगा में बहे मजदूर की दोनों पुत्रियों के नाम एक-एक लाख रुपये की एफडी भी जल्द ही अभियंताओं की ओर से कराई जाएगी, ताकि उनकी परवरिश में किसी तरह की दिक्कत न आने पाए। इसके अलावा कन्या सुमंगल योजना, कन्या विवाह योजना, विधवा पेंशन योजना और अंत्योदय राशन कार्य की पात्रता सूची में भी आश्रित परिवार को शामिल किया जाएगा।
गंगोली शिवाला से संगम नोज के बीच नहीं मिला शव
पांटून पुल निर्माण के दौरान गंगा में बहेे मजदूर अरुण निषाद का बृहस्पतिवार को भी पता नहीं चल सका। एसडीआरएफ व जल पुलिस की दो-दो और प्राइवेट गोताखोरों की एक टीम लगाकर मजदूर की तलाश करती रहीं। देर शाम तक गंगोली शिवाला से लेकर संगम नोज के आगे अरैल घाट, छतनाग घाट तक उसकी तलाश का नतीजा सिफर ही रहा।