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प्रतापगढ़ः 88 सरकार अस्पतालों में एक भी पैथालॉजिस्ट नहीं
Mon, 18 Mar 2019 01:11 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 18 Mar 2019 01:11 AM IST
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जिले के सरकारी अस्पतालों का हाल हैरान करने वाला है। 88 सरकारी अस्पतालों में पैथालॉजिस्ट ही नहीं है। सिर्फ जिला अस्पताल में इनकी पैथालॉजिस्ट है। लैब टेक्नीशियन मरीजों की जांच कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों से मिलने वाले जांच रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिला महिला अस्पताल में ही प्रतिदिन सैकड़ों महिलाओं के खून और पेशाब की जांचकर रिपोर्ट दी जाती है। पैथालॉजिस्ट की जगह लैब टेक्नीशियन अपना हस्ताक्षर कर रिपोर्ट थमा भी देता है।
जनपद में 27 सीएचसी 55 पीएचसी और जिला व महिला अस्पताल को मिलाकर 89 सरकारी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सरकारी अस्पतालों में खून, पेशाब, मलेरिया, एचआईवी सहित दर्जनों जांच की व्यवस्था की गई है। मगर जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो बाकी एक भी सरकारी अस्पताल में पैथालॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। पैथालॉजिस्ट का काम लैब टेक्नीशियन करता है। खुद मरीजों का खून लेता है और जांच करने के बाद रिपोर्ट भी थमा देता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक खुद अपने अस्पताल की रिपोर्ट को सही मानने को तैयार नहीं होते हैं। वह मरीजों को बाहर के पैथालॉजी से जांच कराने की सलाह देते हैं। इस समस्या की ओर सीएमएस और सीएमओ का ध्यान नहीं पड़ रहा है। जुगाड़ पर काम चलाया जा रहा है।
सीएचसी और पीएचसी पर तैनात एमबीबीएस चिकित्सकों को ही पैथालॉजिस्ट बना दिया गया है। खुद की निगरानी में खून-पेशाब आदि जांच कराकर मरीजों को रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए सीएमओ ने आदेश दिया है। मगर एमबीबीएस चिकित्सक यह देखने तक नहीं जाते हैं कि ब्लड लेने के बाद मरीजों के खून की जांच कैसे होती है। एक कर्मचारी ने बताया कि मलेरिया की जांच रिपोर्ट पैथालॉजिस्ट ही दे सकता है।
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। खासतौर पर जिला महिला अस्पताल में। यहां प्रतिदिन गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। मगर पैथालॉजिस्ट के न होने के बाद भी लैब टेक्नीशियन ही रिपोर्ट तैयार कर थमा देता है। इसी रिपोर्ट पर डॉक्टर इलाज भी शुरू कर देते हैं।
जिला अस्पताल में ईसीजी तो होता है, मगर ईसीजी करने वाले टेक्नीशियन की तैनाती शासन स्तर से नहीं की गई है। बगैर टेक्नीशियन प्रतिदिन मरीजों से 60 रुपये शुल्क लेकर अप्रशिक्षित लोग मरीजों को रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। डॉक्टर रिपोर्ट देखकर मरीजों का इलाज करते हैं। कई बार जिला अस्पताल की ईसीजी रिपोर्ट में मरीजों की हालत बेहद खराब आई है। वहीं ईसीजी रिपोर्ट प्राइवेट में कराने के बाद हालत सामान्य पाई गई। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
रिक्त चल रहे पदों के बारे में शासन को प्रत्येक माह रिपोर्ट भेजी जाती है। पैथालॉजिस्ट और ईसीजी टेक्नीशियन का प्रदेश में टोटा है। पैथालॉजिस्ट का काम डॉक्टर तो ईसीजी टेक्नीशियन का कार्य स्टाफ नर्स कर रही हैं। उन्हें जल्द ही ट्रेनिंग दिलाई जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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जनपद में 27 सीएचसी 55 पीएचसी और जिला व महिला अस्पताल को मिलाकर 89 सरकारी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सरकारी अस्पतालों में खून, पेशाब, मलेरिया, एचआईवी सहित दर्जनों जांच की व्यवस्था की गई है। मगर जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो बाकी एक भी सरकारी अस्पताल में पैथालॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। पैथालॉजिस्ट का काम लैब टेक्नीशियन करता है। खुद मरीजों का खून लेता है और जांच करने के बाद रिपोर्ट भी थमा देता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक खुद अपने अस्पताल की रिपोर्ट को सही मानने को तैयार नहीं होते हैं। वह मरीजों को बाहर के पैथालॉजी से जांच कराने की सलाह देते हैं। इस समस्या की ओर सीएमएस और सीएमओ का ध्यान नहीं पड़ रहा है। जुगाड़ पर काम चलाया जा रहा है।
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सीएचसी और पीएचसी पर तैनात एमबीबीएस चिकित्सकों को ही पैथालॉजिस्ट बना दिया गया है। खुद की निगरानी में खून-पेशाब आदि जांच कराकर मरीजों को रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए सीएमओ ने आदेश दिया है। मगर एमबीबीएस चिकित्सक यह देखने तक नहीं जाते हैं कि ब्लड लेने के बाद मरीजों के खून की जांच कैसे होती है। एक कर्मचारी ने बताया कि मलेरिया की जांच रिपोर्ट पैथालॉजिस्ट ही दे सकता है।
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। खासतौर पर जिला महिला अस्पताल में। यहां प्रतिदिन गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। मगर पैथालॉजिस्ट के न होने के बाद भी लैब टेक्नीशियन ही रिपोर्ट तैयार कर थमा देता है। इसी रिपोर्ट पर डॉक्टर इलाज भी शुरू कर देते हैं।
जिला अस्पताल में ईसीजी तो होता है, मगर ईसीजी करने वाले टेक्नीशियन की तैनाती शासन स्तर से नहीं की गई है। बगैर टेक्नीशियन प्रतिदिन मरीजों से 60 रुपये शुल्क लेकर अप्रशिक्षित लोग मरीजों को रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। डॉक्टर रिपोर्ट देखकर मरीजों का इलाज करते हैं। कई बार जिला अस्पताल की ईसीजी रिपोर्ट में मरीजों की हालत बेहद खराब आई है। वहीं ईसीजी रिपोर्ट प्राइवेट में कराने के बाद हालत सामान्य पाई गई। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
रिक्त चल रहे पदों के बारे में शासन को प्रत्येक माह रिपोर्ट भेजी जाती है। पैथालॉजिस्ट और ईसीजी टेक्नीशियन का प्रदेश में टोटा है। पैथालॉजिस्ट का काम डॉक्टर तो ईसीजी टेक्नीशियन का कार्य स्टाफ नर्स कर रही हैं। उन्हें जल्द ही ट्रेनिंग दिलाई जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।