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पुलिस आयुक्त बताएं कि अश्लील वीडियो बनाने में इस्तेमाल मोबाइल की बरामदगी क्यों नहीं हुई: कोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाने के आरोपों की विवेचना में झूंसी पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि घटना में प्रयुक्त मोबाइल और वीडियो की अब तक बरामदगी क्यों नहीं है? इसके लिए पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की अदालत ने झूंसी निवासी याची की याचिका पर दिया है। मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र का है।
याची पर उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठान में कम करने वाली महिला ने एफआईआर दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि पति संग उसके वैवाहिक मतभेद का लाभ उठा कर याची से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बनाया। वीडियो उसके पति को भेजने के बाद डिलीट भी कर दिया।
एफआईआर को रद्द करने की मांग के साथ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता नित्यानंद श्रीवास्तव ने दलील दी कि याची को मामले में झूठा फंसाया गया है।
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उसके कब्जे से कोई ऐसा मोबाइल बरामद नहीं हुआ है जिससे कथित वीडियो बनाने व मिटाने का सबूत हो। वहीं, पीड़िता के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने याचिका का विरोध किया। कोर्ट ने पाया कि विवेचक ने उस मोबाइल की बरामदगी का जिक्र विवेचना में नहीं किया और न ही उसे बरामद किया जिससे वीडियो बनाने का आरोप लगाया गया है।
लिहाजा, कोर्ट ने 20 नवंबर की तारीख नियत करते हुए पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत व पीड़िता की जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि घटना में प्रयुक्त मोबाइल और वीडियो की अब तक बरामदगी क्यों नहीं है? इसके लिए पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की अदालत ने झूंसी निवासी याची की याचिका पर दिया है। मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र का है।
याची पर उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठान में कम करने वाली महिला ने एफआईआर दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि पति संग उसके वैवाहिक मतभेद का लाभ उठा कर याची से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बनाया। वीडियो उसके पति को भेजने के बाद डिलीट भी कर दिया।
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एफआईआर को रद्द करने की मांग के साथ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता नित्यानंद श्रीवास्तव ने दलील दी कि याची को मामले में झूठा फंसाया गया है।
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उसके कब्जे से कोई ऐसा मोबाइल बरामद नहीं हुआ है जिससे कथित वीडियो बनाने व मिटाने का सबूत हो। वहीं, पीड़िता के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने याचिका का विरोध किया। कोर्ट ने पाया कि विवेचक ने उस मोबाइल की बरामदगी का जिक्र विवेचना में नहीं किया और न ही उसे बरामद किया जिससे वीडियो बनाने का आरोप लगाया गया है।
लिहाजा, कोर्ट ने 20 नवंबर की तारीख नियत करते हुए पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत व पीड़िता की जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।