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Pilot Baba : संगम की रेती से विश्व समुदाय को जोड़ने की पायलट बाबा ने की थी अनूठी पहल
Wed, 21 Aug 2024 05:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 21 Aug 2024 05:12 PM IST
सार
कुंभ में विदेशी शिष्याओं और भक्तों को लेकर सुर्खियों में रहे पायलट बाबा के महाप्रयाण के बाद संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। जूना अखाड़े के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने उन्हें सनातनधर्म का वैश्विक संवाहक बताया।
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पायलट बाबा का निधन
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
विंग कमांडर रहे श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा का कुंभनगरी से गहरा नाता रहा है। वर्ष 2013 में उन्होंने संगम की रेती पर महामंडलेश्वर परिषद का गठन कर अखाड़ों के पेशानी पर बल डाल दिया था। संगम की रेती से विश्व समुदाय को जोड़ने और सनातन धर्म के प्रचार के लिए वैस्विर यात्राएं करने के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।
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कुंभ में विदेशी शिष्याओं और भक्तों को लेकर सुर्खियों में रहे पायलट बाबा के महाप्रयाण के बाद संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। जूना अखाड़े के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने उन्हें सनातनधर्म का वैश्विक संवाहक बताया। उनका कहना था कि पायलट बाबा के निधन से धर्म प्रचार का कारवां थम गय है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने पायलट बाबा के निधन को बड़ी क्षति बताया। कहा कि वह हमेशा धर्म के प्रचार के लिएलंबी यात्राएं करते रहे।
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भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद जूना अखाड़े में शामिल हुए थे। उन्हें पायलट बाबा के नाम से पहचान मिली थी। उन्होंने पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में फाइटर पायलट के रूप में अपनी जांबाजी दिखाई थी। देश के सबसे चर्चित संतों में से एक एक पायलट बाबा का गृहस्थ जीवन का नाम कपिल सिंह राजपूत था। बिहार के सासाराम जिले में पैदा हुए पायलट बाबा ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। पायलट बाबा ने 1961 में चीन, 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अपनी जांबाजी दिखाई थी।
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