Phulpur By Election : बदले समीकरण में मतदाताओं की चुप्पी से प्रत्याशियों की बढ़ी चिंता, 12 उम्मीदवार मैदान में
वर्ष 2017 और 2022 में यहां से भाजपा के प्रवीण पटेल विधायक चुने गए थे लेकिन इस बार भाजपा की हैट्रिक लगाने की रणनीति में सपा के मुज्तबा सिद्दीकी से तगड़ी चुनौती मिल रही है। लोकसभा तथा विधानसभा के पिछले तीन चुनाव दोनों ही दलों के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे।
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फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन के साथ नामांकन प्रक्रिया बुधवार को पूरी हो गई। मतदान में 15 दिन भी नहीं बचे हैं लेकिन मतदाता खामोश हैं। रोजाना बदल रहे चुनावी समीकरण के बीच मतदाताओं की चुप्पी ने प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में पूरा चुनाव जातीय गोलबंदी पर टिक गया है।
वर्ष 2017 और 2022 में यहां से भाजपा के प्रवीण पटेल विधायक चुने गए थे लेकिन इस बार भाजपा की हैट्रिक लगाने की रणनीति में सपा के मुज्तबा सिद्दीकी से तगड़ी चुनौती मिल रही है। लोकसभा तथा विधानसभा के पिछले तीन चुनाव दोनों ही दलों के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे। ऐसे में भाजपा और सपा के बीच नजदीकी मुकाबला होने की बात कही जा रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि बीते लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी को फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में ही सबसे अधिक वोट मिले थे। साथ ही बदलते माहौल में बसपा ने जितेंद्र कुमार सिंह को टिकट देकर अगड़ों को भी जोड़ने की कोशिश की है। ऐसे में बसपा परंपरागत वोट बैंक अनुसूचित जाति के साथ अगड़ी जाति के मतदाताओं के ध्रुवीकरण में सफल रही तो नतीजे किसी भी दिशा में जा सकते हैं।
ऐसे में चुनावी खामोशी हैरान करने वाली है। 13 नवंबर को मतदान है लेकिन अब तक किसी बड़े नेता का आगमन नहीं हुआ है। चुनाव पर नजर रख रहे अंदावा के मो. शारिक और दिनेश पटेल का कहना है कि इस उपचुनाव का सरकार की स्थिति पर भी बहुत फर्क नहीं पड़ने वाला है।
एक दल के चुनाव प्रचार में जुटे झूंसी के रविशंकर कहते हैं, त्योहार का भी समय है। इसके अलावा महाकुंभ की चमक भी है। ऐसे में उपचुनाव का शोर दब गया है। दिवाली बाद बड़े नेताओं के आने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। इसके बाद चुनावी समीकरण तेजी से बदलेंगे। इसी के साथ स्थिति भी स्पष्ट होने लगेगी।
किसी ने वापस नहीं लिया नाम, सभी 12 उम्मीदवार मैदान में
फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। बुधवार को भी किसी ने भी नाम वापस नहीं लिया। नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए गए। अब प्रचार में भी तेजी की बात कही जा रही है।
उपचुनाव के लिए 19 लोगों ने नामांकन किया था, लेकिन सात का पर्चा खारिज हो गया। इसके बाद बचे 12 में से किसी भी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। बुधवार तीन बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी करने के साथ चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। इसी के साथ ईवीएम में प्रत्याशियों के क्रम भी तय कर दिए गए।
इसके तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के नाम सबसे ऊपर हैं। सबसे अंत में कांग्रेस से बगावत करके चुनाव लड़ रहे सुरेश चंद्र यादव का नाम है। राजनीतिक दल एवं प्रत्याशी 11 नवंबर शाम छह बजे तक प्रचार कर सकेंगे। 12 नवंबर को मुंडेरा मंडी परिसर से मतदान कर्मियों की रवानगी होगी। 13 नवंबर को मतदान होगा।
प्रत्याशी दल चुनाव चिह्न
- जितेंद्र कुमार सिंह बसपा हाथी
- दीपक पटेल भाजपा कमल
- मो.मुज्तबा सिद्दीकी सपा साइकिल
- कमलेश कुमार राष्ट्रीय समाज पक्ष सीटी
- दिलीप कुमार अपना दल कमेरावादी लिफाफा
- योगेश कुमार कुशवाहा प्रगतिशील समाज पार्टी हेलमेट
- साहिद खां आजाद समाज पार्टी-कांशीराम केतली
- गायत्री निर्दलीय बाल्टी
- दिलीप कुमार यादव निर्दलीय सेब
- रीता विश्वकर्मा निर्दलीय कड़ाही
- विकास सिंह निर्दलीय कैमरा
- सुरेश चंद्र यादव निर्दलीय चारपाई
28 नवंबर तक बन सकते हैं मतदाता
विधानसभा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य मंगलवार से शुरू हो गया। फूलपुर विधानसभा के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में फूलपुर को छोड़कर अन्य विधानसभाओं में मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा कटवाने या अन्य संशोधन के लिए दावे किए जा सकते है। इसके लिए आखिरी तारीख 28 नवंबर है।
मतदाता बनने तथा अन्य तरह के दावों के लिए नौ, 10, 23 एवं 24 नवंबर को विशेष अभियान चलाए जाएंगे। इन तारीखों को बीएलओ अपने-अपने बूथ पर मौजूद रहेंगे। 24 दिसंबर तक आपत्तियों एवं दावों का निस्तारण होगा। इसके बाद छह जनवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अफसरों एवं कर्मचारियों का छह जनवरी तक तबादला भी नहीं हो सकेगा। इसके लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति लेनी होगी।