फाफामऊ सामूहिक हत्याकांड : पांच घंटे तक नहीं उठने दिया शव, मुआवजे-सुरक्षा पर बनी बात, आठ आरोपी हिरासत में
फाफामऊ के गोहरी गांव में एक दिन पहले फूलचंद(50), उसकी पत्नी मीनू(45), 10 वर्षीय बेटे शिव और 17 वर्षीय बेटी मृत मिले थे। धारदार हथियार से वार कर सभी को मौत के घाट उतारा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम की अनुमति से रात में ही पोस्टमार्टम कराया गया। इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल आठ आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है।
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फाफामऊ के गोहरी में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के मामले में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने पांच घंटे तक शव नहीं उठने दिए। बाद में 16.5 लाख मुआवजा, सुरक्षा समेत अन्य आश्वासन पर वह माने और तब शवों को अंतिम संस्कार हुआ। उधर चार और नामजद आरोपी हिरासत में ले लिए गए। अफसरों का कहना है कि उनसे पूछताछ की जा रही है।
सुबह शव गांव लाए जाने पर परिजन एक बार फिर आक्रोशित हो उठे। उन्होंने साफ कह दिया कि उनकी मांगें माने जाने के बाद ही वह अंतिम संस्कार करेंगे। बाद में अफसरों की ओर से लिखित आश्वासन मिलने पर वह शांत हुए। उधर मौकेपर सपा, कांग्रेस, सीपीएम के साथ ही तमाम सामाजिक संगठनों के लोगों का भी जमावड़ा लगा रहा। इस दौरान कानून व्यवस्था पर शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए विपक्षी दलों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया।
उधर मामले की जांच में जुटे पुलिस अफसरों ने बताया कि अब तक कुल आठ नामजद आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। जिनसे पूछताछ जारी है। कई अन्य बिंदुओं पर भी जांच पड़ताल की जा रही है।
फाफामऊ में नृशंसता से मारे गए एक ही परिवार के चार लोगों के शवों का दूसरे दिन कड़ी मशक्कत के बाद पोस्टमार्टम कराया जा सका। इससे पहले परिजनों ने अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया और पांच घंटे तक शवों को नहीं उठने दिया। वह मुआवजे, आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य मांग कर रहे थे। मौके पर जुटे पुलिस व प्रशासनिक अफसर मान-मनौव्वल में जुटे रहे लेकिन वह नहीं माने। बाद में 16.5 लाख मुआवजा, शस्त्र लाइसेंस, सुरक्षा समेत अन्य केसंबंध में लिखित आश्वासन पर करीब तीन बजे बात बनी। इसके बाद चारों शवों का फाफामऊ घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
फाफामऊ के गोहरी गांव में एक दिन पहले फूलचंद(50), उसकी पत्नी मीनू (45), 10 वर्षीय बेटे शिव और 17 वर्षीय बेटी मृत मिले थे। धारदार हथियार से वार कर सभी को मौत के घाट उतारा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम की अनुमति से रात में ही पोस्टमार्टम कराया गया। हालांकि परिजन रात में शव ले जाने को राजी नहीं हुए। शुक्रवार सुबह 10.30 बजे के करीब कड़ी सुरक्षा के बीच चारों शवों को गांव ले जाया गया। तब तक बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो चुके थे।
कुछ ही देर में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का भी जमावड़ा शुरू हो गया। सपाइयों के साथ ही कांग्रेस व कई अन्य दलों के नेता व समर्थक मौकेपर जुट गए। पुलिस व प्रशासनिक अमला वहां पहले ही पहुंच गया था। अफसरों ने आगे की कार्रवाई की बात कही तो परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वह शव नहीं उठने देंगे। वह मुआवजे के साथ ही परिवार को सुरक्षा, शस्त्र लाइसेंस समेत अन्य मांगें पूरी करने की बात कह रहे थे।
अफसरों ने उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं हुए। करीब पांच घंटे तक मान-मनौव्वल चलती रही। इसके बाद मौके पर मौजूद एडीएम एफआर जगदंबा सिंह व एसपी क्राइम सतीश चंद्र ने मांगों के संबंध में लिखित आश्वासन दिया तब जाकर परिजन शांत हुए। इसके बाद करीब तीन बजे परिजनों ने पुलिस को शव उठाने दिया। चारों शवों को फाफामऊ घाट पर ले जाया गया जहां चार बजे के करीब अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इन मांगाें को पूरा करने का मिला आश्वासन
पीड़ित परिवार को 16.50 लाख का मुआवजा
भाइयों को शस्त्र लाइसेंस
लाइसेंस निर्गत होने तक पुलिस सुरक्षा
मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने के लिए प्रस्ताव
जमीन का पट्टा
परिजनों की जो भी उचित मांगें थीं, उन्हें पूरा करने केसंबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। खुलासे के लिए पुलिस की कई टीमें लगी हैं और आलाधिकारी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। - संजय कुमार खत्री, डीएम
पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी
शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जाने से पहले गांव में जबरदस्त गहमागहमी रही। सपा, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पुलिस व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर जुटे अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी।