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श्रमिक अधिकारों के मामले में याचिका खारिज
Tue, 19 May 2020 07:14 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 19 May 2020 07:14 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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श्रम कानून में संशोधन संबंधी अधिसूचना प्रदेश सरकार द्वारा वापस लिए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका अर्थहीन मानते हुए खारिज कर दी है। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अधिसूचना सरकार ने वापस ले ली है, ऐसे में याचिका का औचित्य नहीं रह गया है।
यूपी वर्कर्स फ्रंट की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी। सरकार ने अधिसूचना को वापस लेने की जानकारी दी।
मालूम हो कि राज्य सरकार के श्रम विभाग ने श्रमिक अधिकारों को निलंबित करने की अधिसूचना जारी की थी। इससे फैक्ट्री मालिकों को श्रमिकों से 12 घंटे काम लेने की अनुमति मिल गई थी।
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अभी तक आठ घंटे से लेकर अधिकतम 10 घंटे काम लेने की छूट है। जिसे श्रमिकों के जीवन के मूल अधिकारों एवं श्रम कानूनों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी।
कहा गया था कि अधिक मुनाफे के लिए श्रमिकों का शोषण किया जाएगा और उनकी नौकरी की गारंटी नहीं होगी। सरकार के बैकफुट पर आने से याचिका अर्थहीन मानते हुए खारिज कर दी गयी है।
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यूपी वर्कर्स फ्रंट की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी। सरकार ने अधिसूचना को वापस लेने की जानकारी दी।
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मालूम हो कि राज्य सरकार के श्रम विभाग ने श्रमिक अधिकारों को निलंबित करने की अधिसूचना जारी की थी। इससे फैक्ट्री मालिकों को श्रमिकों से 12 घंटे काम लेने की अनुमति मिल गई थी।
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अभी तक आठ घंटे से लेकर अधिकतम 10 घंटे काम लेने की छूट है। जिसे श्रमिकों के जीवन के मूल अधिकारों एवं श्रम कानूनों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी।
कहा गया था कि अधिक मुनाफे के लिए श्रमिकों का शोषण किया जाएगा और उनकी नौकरी की गारंटी नहीं होगी। सरकार के बैकफुट पर आने से याचिका अर्थहीन मानते हुए खारिज कर दी गयी है।