जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने का आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीमकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज रेखा सिंह के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से मतदान कराने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेखा सिंह के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया जिससे मतदान की गोपनीयता भंग हुई है।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी। लक्ष्मी सिंह और अन्य की ओर से दाखिल अपील पर न्यायमूर्ति एनवी रम्मना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की।
याची के वकीलों का कहना था कि हाईकोर्ट का आदेश मतदान की गोपनीयता को लेकर सुप्रीमकोर्ट की संविधान पीठ द्वारा एस रघुवीर सिंह गिल केस के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। मतों की गोपनीयता का प्रश्न इस बात पर निर्भर करता है कि मतदान निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में हो और मतदाताओं को विश्वास हो कि उनका मत सार्वजनिक नहीं होगा।
याची पक्ष के वकीलों ने अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से मतदान कराने का कोर्ट का सुझाव दिया। याची भी इससे सहमत थे। इसे देखते हुए सुप्रीमकोर्ट ने जिला जज इलाहाबाद को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर मतदान की नई तिथि घोषित कर स्वयं या किसी अपर जिला जज की निगरानी में अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से वोटिंग कराएं।
शेष 45 मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। पीठासीन अधिकारी ने उसी दिन अविश्वास प्रस्ताव आधे से अधिक के बहुमत से पारित घोषित कर दिया। रेखा सिंह ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा गया कि मतदान के दौरान सदस्यों ने गोपनीयता का पालन नहीं किया और एक दूसरे को दिखाकर वोट डाले। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी हाईकोर्ट में पेश की गई। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव रद्द कर दिया था।