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High Court : आगरा के थाना प्रभारी व विवेचना अधिकारी को प्रशिक्षित करने का आदेश
Thu, 25 Jul 2024 04:19 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 25 Jul 2024 04:19 PM IST
सार
कोर्ट ने अनावश्यक रूप से परेशान करने के बदले में पुलिस अधिकारियों व शिकायतकर्ता प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये याची को देने का निर्देश दिया है। साथ ही याची के खिलाफ जारी समन व केस कार्यवाही कोर्ट ने रद्द कर दी। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने भूरी सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना अपराध के चार्जशीट दाखिल करने पर आगरा के नाई की मंडी थाना इंचार्ज व विवेचना अधिकारी संतोष कुमार के खिलाफ विभागीय जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने इन अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने अनावश्यक रूप से परेशान करने के बदले में पुलिस अधिकारियों व शिकायतकर्ता प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये याची को देने का निर्देश दिया है। साथ ही याची के खिलाफ जारी समन व केस कार्यवाही कोर्ट ने रद्द कर दी। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने भूरी सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया है।
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याची भूरी सिंह सीएनजी टेंपो का मालिक था। उसने कुछ कारणों से अपना टेंपो सब्बीर खान को बेच दिया था। सब्बीर ने वाहन अपने नाम नहीं कराया। 14 अगस्त 2017 को सब्बीर खान ने टेंपो शिकायतकर्ता आरिफ हुसैन को बेच दिया। साथ ही मूल पेपर सौंप दिए। इस दौरान वाहन चोरी हो गया और आरिफ हुसैन ने याची मूल मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई।
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पुलिस ने विवेचना कर चार्जशीट दाखिल की और ट्रायल कोर्ट ने मैकेनिकल तरीके से समन भी जारी कर दिया। जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याची व शिकायतकर्ता के बीच कोई संबंध नहीं है। याची ने कोई अपराध नहीं किया है। इसके बाद भी पुलिस ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इससे याची को परेशान होना पड़ा।