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यूपी पुलिस के 890 हेड कांस्टेबलों को पीएसी में भेजने का आदेश संशोधित
Mon, 28 Sep 2020 09:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 28 Sep 2020 09:33 PM IST
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पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के लगभग नौ सौ हेड कांस्टेबलों को पदावनत कर सिविल पुलिस से पीएसी में भेजे जाने के आदेश को अपर पुलिस महानिदेशक ने संशोधित कर दिया है। इस आशय की जानकारी सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता द्वारा कोर्ट को दी गई। इसके बाद कोर्ट ने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर एक अक्तूबर को सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
पारस नाथ पांडेय सहित सैकड़ों कांस्टेबलों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याचिका में नौ व 10 सितंबर 2020 को पारित डीआईजी स्थापना, पुलिस मुख्यालय व अपर पुलिस महानिदेशक के आदेशों को चुनौती दी गई है। इन आदेशों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 890 हेड कांस्टेबलों को पदावनत कर आरक्षी बना दिया गया है और उन्हें पीएसी में स्थानांतरित कर दिया गया है। कोर्ट के निर्देश पर शासन से प्राप्त लिखित जानकारी याचीगण की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम को दी गई ।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि वह शासन की ओर से प्राप्त जानकारी का अध्ययन कर अपना जवाब दाखिल करेंगे। अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना द्वारा संशोधित आदेश में पीएसी में भेजे गए कांस्टेबलों को वहीं प्रोन्नति देने की बात आ रही है। याचिकाओं में मुख्य रूप से कहा गया है कि इतने वृहद स्तर पर हेड कांस्टेबलों को पदावनत और पीएसी में स्थानांतरित करने का आदेश बगैर उन्हें सुनवाई का अवसर दिए करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है । कहा यह भी गया है कि कांस्टेबलों को 20 वर्ष के बाद सिविल पुलिस से पीएसी में वापस भेजना शासनादेशों के विरूद्ध है ।
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पारस नाथ पांडेय सहित सैकड़ों कांस्टेबलों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याचिका में नौ व 10 सितंबर 2020 को पारित डीआईजी स्थापना, पुलिस मुख्यालय व अपर पुलिस महानिदेशक के आदेशों को चुनौती दी गई है। इन आदेशों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 890 हेड कांस्टेबलों को पदावनत कर आरक्षी बना दिया गया है और उन्हें पीएसी में स्थानांतरित कर दिया गया है। कोर्ट के निर्देश पर शासन से प्राप्त लिखित जानकारी याचीगण की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम को दी गई ।
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वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि वह शासन की ओर से प्राप्त जानकारी का अध्ययन कर अपना जवाब दाखिल करेंगे। अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना द्वारा संशोधित आदेश में पीएसी में भेजे गए कांस्टेबलों को वहीं प्रोन्नति देने की बात आ रही है। याचिकाओं में मुख्य रूप से कहा गया है कि इतने वृहद स्तर पर हेड कांस्टेबलों को पदावनत और पीएसी में स्थानांतरित करने का आदेश बगैर उन्हें सुनवाई का अवसर दिए करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है । कहा यह भी गया है कि कांस्टेबलों को 20 वर्ष के बाद सिविल पुलिस से पीएसी में वापस भेजना शासनादेशों के विरूद्ध है ।
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