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बुजुर्ग के खाते से ढाई लाख रुपये गायब होने के मामले में कानपुर के प्रवर अधीक्षक प्रधान डाकघर पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश
Wed, 08 Sep 2021 04:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Sep 2021 04:11 PM IST
सार
कानपुर के फजलगंज निवासी 70 वर्षीय लल्लू राम यादव ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि 16 अप्रैल 2008 को उन्होंने डाकघर में ढाई लाख रुपये एक वर्ष की सावधि जमा खाते में जमा किए।
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- फोटो : social media
विस्तार
70 साल के बुजुर्ग के डाकघर खाते में जमा ढाई लाख रुपये गायब होने के मामले में सीजेएम इलाहाबाद ने प्रधान डाकघर के प्रवर अधीक्षक , डाकपाल व अज्ञात कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना प्रभारी सिविल लाइंस को आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्र नाथ ने यह आदेश आवेदक लल्लू राम यादव के प्रार्थना पत्र पर धीरज कुमार यादव एडवोकेट के तर्कों को सुन कर दिया है।
कानपुर के फजलगंज निवासी 70 वर्षीय लल्लू राम यादव ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि 16 अप्रैल 2008 को उन्होंने डाकघर में ढाई लाख रुपये एक वर्ष की सावधि जमा खाते में जमा किए। आवेदक जब अपनी रकम निकालने के लिए डाक घर आया तो कर्मचारियों के द्वारा बताया गया कि पैसा निकल चुका है यहां कोई रिकॉर्ड नहीं है। आरोप लगाया गया कि 15 जनवरी 2021 को डाकघर के अधिकारियों ने उसके पास एक पत्र भेजा। जिसमें सूचित किया कि खाता डाकघर के अभिलेख अनुसार अस्तित्व में नहीं है। आवेदक ने इसकी सूचना थाना सिविल लाइन एवं अन्य अधिकारियों को दी। जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।
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कानपुर के फजलगंज निवासी 70 वर्षीय लल्लू राम यादव ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि 16 अप्रैल 2008 को उन्होंने डाकघर में ढाई लाख रुपये एक वर्ष की सावधि जमा खाते में जमा किए। आवेदक जब अपनी रकम निकालने के लिए डाक घर आया तो कर्मचारियों के द्वारा बताया गया कि पैसा निकल चुका है यहां कोई रिकॉर्ड नहीं है। आरोप लगाया गया कि 15 जनवरी 2021 को डाकघर के अधिकारियों ने उसके पास एक पत्र भेजा। जिसमें सूचित किया कि खाता डाकघर के अभिलेख अनुसार अस्तित्व में नहीं है। आवेदक ने इसकी सूचना थाना सिविल लाइन एवं अन्य अधिकारियों को दी। जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।
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