UP : विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने हाईकोर्ट को बताया- ठेकेदारों की केवल दो श्रेणियां, ए और बी
पीडीए द्वारा विद्युतीकरण की निविदा में ए श्रेणी के अनुमोदित ठेकेदार की नई श्रेणी की शर्तें लागू करने पर उठे विवाद की सुनवाई न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ कर रही है।
विस्तार
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) द्वार विद्युतीकरण की निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों के चयन को लेकर उठे विवाद में विद्युत सुरक्षा निदेशालय की ओर से मंगलवार को हलफनामा दाखिल कर दिया गया। बताया गया कि पीडीए द्वारा प्रकाशित निविदा के लिए ए और बी श्रेणी के ठेकेदार ही योग्य हैं। ए श्रेणी और ए श्रेणी के अनुमोदित ठेकेदार में कोई अंतर नही है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया कि ए श्रेणी के अनुमोदित ठेकेदार जैसी किसी श्रेणी का कोई प्रावधान नही है।
पीडीए द्वारा विद्युतीकरण की निविदा में ए श्रेणी के अनुमोदित ठेकेदार की नई श्रेणी की शर्तें लागू करने पर उठे विवाद की सुनवाई न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ कर रही है। ए श्रेणी की ठेकेदार याची फर्म प्रभावती इलेक्ट्रिक वर्क्स की ओर से याचिका दाखिल कर पीडीए की ओर से रखी गई शर्त को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने विवाद के निपटारे के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशक से हलफनामे पर स्पष्ट जानकारी तलब की थी। मंगलवार को निदेशालय की ओर से अदालत में पेश हुए विद्युत सुरक्षा विभाग के अपर निदेशक हेमंत शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि ठेकेदार की केवल दो श्रेणियां हैंं, ए और बी।
पीडीए का हलफनामा...जवाब गोलमोल
जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए पीडीए ने गोलमोल जवाब दिया। विद्युत सुरक्षा निदेशक की ओर से जारी कार्यालय आदेशों का हवाला देते हुए यह निविदा में निर्धारित शर्तों को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन यह नही बताया कि किन परिस्थितियों में स्थगन आदेश के बावजूद निविदा को अंतिम रूप दिया गया।
बुलडोजर चलाने की धमकी देने का आरोप
याची फर्म के अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि याची फर्म के पार्टनर पंकज सिंह की ओर से उनके पिता उदय राज सिंह ने हलफनामा दाखिल कर पीडीए के उपाध्यक्ष और मुख्य अभियंता पर याचिका वापस लेने के लिए दबाव बनाने की शिकायत कोर्ट से की है। आरोप लगाया है कि याचिका वापस न लेने पर पीडीए के अधिकारी घर पर बुलडोजर चलवाने की धमकी दे रहे है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 23 जनवरी नियत की है।
क्या है पूरा मामला
पीडीए ने झूंसी पुलिया से कटका, एसआरएन अस्पताल से महात्मा गांधी मार्ग, शांतिपुरम के सेक्टर ए से बेला कछार और पुराने यमुना पुल के नीचे एलईडी लाइट लगाने और अन्य विद्युतीकरण के कार्यों के लिए अक्तूबर में निविदा आमंत्रित की थी। जिसके लिए याची ने भी निविदा डाली थी। ए श्रेणी का ठेकेदार होने के बावजूद पीडीए ने याची फर्म को तकनीकी आधार पर निविदा प्रक्रिया से बाहर कर दिया, जबकि याची ने अन्य ठेकेदारों के मुकाबले कम दर पर निविदा डाली थी।
याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 23 नवंबर को सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप दिए जाने पर रोक लगाई थी। लेकिन इस बीच पीडीए की ओर से निविदा खोल दी गई और ठेकेदार को काम भी सौंप दिया गया। याची की ओर से अदालत में अवमानना प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया तो कोर्ट ने पीडीए के अधिकारियों और विद्युत सुरक्षा निदेशक को हलफनामे के साथ मंगलवार को तलब किया था।