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नेताजी को नमन कर आजादी के लिए बुलंद की आवाज
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Opposing voice of Buland by bowing to Netaji
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी के विरोध में मंसूर अली पार्क में धरना लगातार 12वें दिन भी जारी रहा। खास बात यह रही कि धरनास्थल पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने बृहस्पतिवार को जयंती पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस को नमन कर अपनी आवाज बुलंद की।
खुल्दाबद के रोशनबाग स्थित मंसूर अली पार्क में चल रहे धरने के 12वें दिन भी बड़ी संख्या में लोग धरने में शामिल हुए। सुबह से ही यहां बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुटी रहीं। इस दौरान तमाम वक्ताओं ने सीएए व एनआरसी को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। धरनास्थल पर महिलाओं के साथ ही तमाम छात्र व अन्य संगठनों के पदाधिकारी भी जुटे रहे। धरने में शामिल महिलाओं का कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती, वह प्रदर्शन जारी रखेंगी। उनका विरोध प्रदर्शन किसी सरकार या कानून के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय व जिद के खिलाफ है। धरने में महिलाओं के साथ ही छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए जो हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जता रहे थे। इन तख्तियों में नो एनआरसी, नो सीएए, इंकलाब जिंदाबाद, हम भी देखेंगे, सरफरोशी की तमन्ना जैसे नारे लिखे हुए थे। उधर प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल पर ही अमर शहीद नेताजी सुभाष चंद बोस की जयंती मनाई। उन्हें नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नेताजी के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उनसे सीखना चाहिए कि जुल्म व अत्याचार के खिलाफ मरते दम तक लड़ाई जारी रखी जानी चाहिए। धरने में शामिल प्रदर्शनकारियों को तमाम संगठनों के वक्ताओं ने संबोधित किया। जिनमें सबसे प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता महमूद प्राचा का संबोधन रहा। उधर प्रदर्शन में शामिल भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि बहादुर महिलाओं ने आरएसएस-भाजपा का उनकी रक्षा करने का मुखौटा उखाड़ दिया। वे इस बात से भयभीत हैं कि ये महिलाएं भारी ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में दिन-रात विरोध कर रही हैं।
तिरंगा लेकर निकलीं पर्दानशीं
उधर दोपहर में रोशनबाग के आसपास के इलाकों से महिलाओं ने अलग-अलग समूहों में जुलूस निकाला और जुलूस की शक्ल में ही वह धरना स्थल पर पहुंचीं। जुलूस में शामिल सभी महिलाओं के हाथों में तिरंगा था। यह जुलूस अटाला, नुरुल्लाहरोड, बहादुरगंज, बक्शीबाजार आदि मोहल्लों से निकाले गए।
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खुल्दाबद के रोशनबाग स्थित मंसूर अली पार्क में चल रहे धरने के 12वें दिन भी बड़ी संख्या में लोग धरने में शामिल हुए। सुबह से ही यहां बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुटी रहीं। इस दौरान तमाम वक्ताओं ने सीएए व एनआरसी को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। धरनास्थल पर महिलाओं के साथ ही तमाम छात्र व अन्य संगठनों के पदाधिकारी भी जुटे रहे। धरने में शामिल महिलाओं का कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती, वह प्रदर्शन जारी रखेंगी। उनका विरोध प्रदर्शन किसी सरकार या कानून के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय व जिद के खिलाफ है। धरने में महिलाओं के साथ ही छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए जो हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जता रहे थे। इन तख्तियों में नो एनआरसी, नो सीएए, इंकलाब जिंदाबाद, हम भी देखेंगे, सरफरोशी की तमन्ना जैसे नारे लिखे हुए थे। उधर प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल पर ही अमर शहीद नेताजी सुभाष चंद बोस की जयंती मनाई। उन्हें नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नेताजी के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उनसे सीखना चाहिए कि जुल्म व अत्याचार के खिलाफ मरते दम तक लड़ाई जारी रखी जानी चाहिए। धरने में शामिल प्रदर्शनकारियों को तमाम संगठनों के वक्ताओं ने संबोधित किया। जिनमें सबसे प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता महमूद प्राचा का संबोधन रहा। उधर प्रदर्शन में शामिल भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि बहादुर महिलाओं ने आरएसएस-भाजपा का उनकी रक्षा करने का मुखौटा उखाड़ दिया। वे इस बात से भयभीत हैं कि ये महिलाएं भारी ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में दिन-रात विरोध कर रही हैं।
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तिरंगा लेकर निकलीं पर्दानशीं
उधर दोपहर में रोशनबाग के आसपास के इलाकों से महिलाओं ने अलग-अलग समूहों में जुलूस निकाला और जुलूस की शक्ल में ही वह धरना स्थल पर पहुंचीं। जुलूस में शामिल सभी महिलाओं के हाथों में तिरंगा था। यह जुलूस अटाला, नुरुल्लाहरोड, बहादुरगंज, बक्शीबाजार आदि मोहल्लों से निकाले गए।

Opposing voice of Buland by bowing to Netaji- फोटो : CITY DESK

Opposing voice of Buland by bowing to Netaji- फोटो : CITY DESK

Opposing voice of Buland by bowing to Netaji- फोटो : CITY DESK
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