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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Only the Rent Authority has the jurisdiction to hear rent-related disputes.

High Court : किराया संबंधित विवाद की सुनवाई का अधिकार सिर्फ किराया प्राधिकरण के पास

Sun, 14 Jun 2026 03:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 14 Jun 2026 03:53 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम लागू होने के बाद मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराया संबंधी विवादों की सुनवाई का अधिकार सिर्फ किराया प्राधिकरण (रेंट अथॉरिटी) के पास है।

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Only the Rent Authority has the jurisdiction to hear rent-related disputes.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम लागू होने के बाद मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराया संबंधी विवादों की सुनवाई का अधिकार सिर्फ किराया प्राधिकरण (रेंट अथॉरिटी) के पास है। ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट के समक्ष दायर वाद पोषणीय नहीं होंगे।

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यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ.योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने श्रीराम व अन्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार पर दिया। मामले में मकान मालिक शिवसेवक शर्मा ने हाथरस के जिला जज की अदालत में बढ़े किराये की मांग को लेकर वाद दायर किया था। इसके विरुद्ध किरायेदारों ने सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत आवेदन देकर कहा कि उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम के अनुसार सिविल कोर्ट को ऐसे विवादों की सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसलिए वाद खारिज किया जाए।
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हालांकि, जिला जज की अदालत ने 19 मार्च 2026 को यह आवेदन खारिज कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा कि वादी स्वयं स्वीकार कर चुका है कि संबंधित संपत्ति पर उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम लागू होता है। दोनों पक्षों के बीच मकान मालिक और किरायेदार का संबंध भी निर्विवाद है। ऐसे में विवाद के निस्तारण का अधिकार केवल रेंट अथॉरिटी को है।
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कोर्ट ने कहा कि वादपत्र की जांच करते समय केवल वादी के कथनों को देखा जाता है। यदि मकान मालिक-किरायेदार संबंध स्वीकार है तो लिखित किरायानामा न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। अधिनियम के तहत ऐसे सभी विवादों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को समाप्त कर देती है। अदालत ने हाथरस के जिला जज की अदालत 19 मार्च 2026 का आदेश निरस्त करते हुए किरायेदारों की अर्जी स्वीकार कर ली। साथ ही कहा कि वादी अपनी शिकायत किराया प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, जहां कानून के अनुसार नए सिरे से मामले पर विचार कर निर्धारित अवधि में उसका निस्तारण किया जाएगा।

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