{"_id":"6a18ac696ad96269620d57d9","slug":"on-receipt-of-the-co-chargesheet-send-it-for-re-investigation-or-present-it-in-the-court-court-allahabad-news-c-3-ald1020-895284-2026-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीओ चार्जशीट मिलने पर उसे पुन: जांच के लिए भेजें या अदालत में पेश करें: कोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीओ चार्जशीट मिलने पर उसे पुन: जांच के लिए भेजें या अदालत में पेश करें: कोर्ट
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में स्पष्टता लाने के लिए डीजीपी को सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। कहा है कि सुनिश्चित करना होगा कि जांच अधिकारी की ओर से चार्जशीट प्रस्तुत करने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके तहत या तो उसे पुन: जांच के लिए भेजा जाए या फिर बिना देरी सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने गुलाब चंद सैनी और अन्य की याचिका पर दिया है। मथुरा निवासी गुलाब चंद सैनी समेत चार याचियों से जुड़ा है, जिनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज है।
याचियों ने गिरफ्तारी पर रोक और एफआईआर रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। तीन अप्रैल को हाईकोर्ट ने याचिका यह मानते हुए खारिज कर दी थी कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। यह जानकारी डीजीपी कार्यालय के लीगल सेल की रिपोर्ट में दी गई थी।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता ने इस मामले में रिकॉल अर्जी दाखिल कर कोर्ट को बताया कि चार्जशीट वास्तव में अदालत में पेश ही नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से तैयार चार्जशीट केवल क्षेत्राधिकारी कार्यालय में लंबित थी, लेकिन पुलिस पोर्टल पर उसे दाखिल दिखा दिया गया।
कोर्ट ने दलील को सही मानते हुए पुराना आदेश वापस ले लिया और याचिका बहाल कर दी। निर्देश दिया कि जब तक चार्जशीट अदालत में पेश नहीं होती, तब तक याचियों को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी। ब्यूरो
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने गुलाब चंद सैनी और अन्य की याचिका पर दिया है। मथुरा निवासी गुलाब चंद सैनी समेत चार याचियों से जुड़ा है, जिनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज है।
विज्ञापन
याचियों ने गिरफ्तारी पर रोक और एफआईआर रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। तीन अप्रैल को हाईकोर्ट ने याचिका यह मानते हुए खारिज कर दी थी कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। यह जानकारी डीजीपी कार्यालय के लीगल सेल की रिपोर्ट में दी गई थी।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता ने इस मामले में रिकॉल अर्जी दाखिल कर कोर्ट को बताया कि चार्जशीट वास्तव में अदालत में पेश ही नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से तैयार चार्जशीट केवल क्षेत्राधिकारी कार्यालय में लंबित थी, लेकिन पुलिस पोर्टल पर उसे दाखिल दिखा दिया गया।
कोर्ट ने दलील को सही मानते हुए पुराना आदेश वापस ले लिया और याचिका बहाल कर दी। निर्देश दिया कि जब तक चार्जशीट अदालत में पेश नहीं होती, तब तक याचियों को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी। ब्यूरो