Prayagraj : सरकारी जमीन बेचे जाने के मामले में सीएम कार्यालय को भी गुमराह करते रहे अफसर
मामले में कीडगंज के राजू केसरवानी की ओर से स्थानीय अफसरों के अलावा मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई थी। इसी क्रम मेें नायब तहसीलदार की जांच में शिकायत सही पाई गई। नायब तहसीलदार की ओर से मार्च में सौंपी गई रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी।
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मिनहाजपुर में सरकारी जमीन बेचे जाने के मामले तहसील प्रशासन मुख्यमंत्री कार्यालय को भी गुमराह करता रहा। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री पोर्टल पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बाबत रिपोर्ट भेज दी गई लेकिन छह महीने बाद भी कुछ नहीं हुआ।
अमर उजाला में खबर छपने के बाद अब जिम्मेदार तहसीलदार से जवाब तलब करने की तैयारी है। मिनहाजपुर में राजकीय आस्थान की जमीन 1888 में धर्मशाला के लिए पट्टे पर दी गई थी लेकिन उसके शेष भाग की अवैध तरीके से बिक्री कर दी गई। इस पर 20 से अधिक लोगों ने अवैध तरीके से दुकान, मकान आदि निर्माण करा लिए हैं।
मामले में कीडगंज के राजू केसरवानी की ओर से स्थानीय अफसरों के अलावा मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई थी। इसी क्रम मेें नायब तहसीलदार की जांच में शिकायत सही पाई गई। नायब तहसीलदार की ओर से मार्च में सौंपी गई रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी।
शिकायत प्रकोष्ठ के प्रभारी तहसीलदार की ओर से जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की संस्तुति की बाबत जवाब मुख्यमंत्री के पोर्टल भी भेजा गया लेकिन छह महीने बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
अब अमर उजाला की ओर से प्रकरण सामने लाए जाने के बाद एसडीएम ने पीडीए को अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के लिए लिखा है। इसके अलावा अवैध तरीके से बिक्री करने एवं निर्माण कराने वालों के खिलाफ एफआईआर लिखकर कार्रवाई के लिए थाने को भी लिखा है। एसडीएम ने समय से जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने को लेकर नायब तहसीलदार और संबंधित बाबू से जवाब मांगा है।
एसडीएम अभिषेक सिंह का कहना है कि आईजीआरएस के प्रभारी तहसीलदार से जवाब तलब किया जाएगा कि पोर्टल पर जांच रिपोर्ट अपलोड करने के बाद भी आगे कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अब भी टालमटोल में जुटा है प्राधिकरण
प्रयागराज विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए बगैर राजकीय आस्थान पर अवैध निर्माण होते रहे लेकिन अफसर मौन रहे। अब एसडीएम की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए लिखे जाने के बाद भी प्राधिकरण के अफसर टालमटोल में जुटे हैं। उपाध्यक्ष अरविंद चौहान का कहना है कि मामला अब संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी। यदि अवैध निर्माण है तो उसका ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।
नहीं देखे जाते दस्तावेज, ...किसी भी जमीन की करा सकते हैं रजिस्ट्री
राजकीय आस्थान ही नहीं किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराई जा सकती है। निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों की कोई छानबीन नहीं होती। पूरे दस्तावेज नहीं हैं तो भी रजिस्ट्री हो जाती है। निबंधन कार्यालय के अफसरों की मानें तो रजिस्ट्री के समय उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के सत्यापन का उन्हें अधिकार ही नहीं है। हां, इतना जरूर है कि किसी ने रजिस्ट्री या भूखंड की स्थिति को लेकर आपत्ति की है तो क्रेता को इससे अवगत करा दिया जाता है।
एआईजी स्टांप राकेश चंद्रा का कहना है कि रजिस्ट्री के समय जो दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उसी आधार पर रजिस्ट्री की जाती है। क्रेता और विक्रेता से खरीद की शर्तों की बाबत स्वीकोरोक्ति ली जाती है। इसके बाद रजिस्ट्री की जाती है। यदि जमीन राजकीय आस्थान, नजूल या शत्रु संपत्ति से जुड़ी है और यह संज्ञान में आता है तो इस बाबत संबंधित विभाग को लिख दिया जाता है लेकिन क्रेता और विक्रेता सहमत हैं तो रजिस्ट्री नहीं रोकी जा सकती।