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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Now you will be able to study Vedas and Puranas with one click, manuscripts and texts are being digitized.

Prayagraj: एक क्लिक में कर सकेंगे वेद और पुराणों का अध्ययन, पांडुलिपियों और ग्रंथों का किया जा रहा डिजिटाइजेशन

Fri, 22 Dec 2023 01:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 Dec 2023 01:04 PM IST
सार

डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा रहे इस अमूल्य संग्रह को परिसर के छात्र और शोध में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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Now you will be able to study Vedas and Puranas with one click, manuscripts and texts are being digitized.
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय गंगा नाथ झा परिसर में संस्कृत प्रतिलिपियों को ऑनलाइन किया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जनकपुरी, नई दिल्ली के चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित गंगा नाथ झा परिसर में वेदों, पुराणों और प्राचीन भारतीय ग्रंथों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। कुल 60,000 हजार ग्रंथों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाना है। इसके पहले 56,000 पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा चुका है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देश में और भी कई परिसर हैं, लेकिन ग्रंथों के डिजिटाइजेशन का कार्य केवल गंगा नाथ झा परिसर में ही हो रहा है। अब तक 3,000 ग्रंथों के डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है।

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डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा रहे इस अमूल्य संग्रह को परिसर के छात्र और शोध में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष और अन्य विषयों की दुर्लभ पुस्तकों को संरक्षित किया जाना है।
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यहां पर संरक्षित हैं 56000 पांडुलिपियां


आयुर्वेद की महत्वपूर्ण पुस्तकें जैसे- चरक संहिता, कश्यप संहिता, सुश्रुत संहिता और वाग्भट्ट का अष्टांग संग्रह अब एक क्लिक पर विद्यार्थियों को उपलब्ध होंगी। पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा में इन्हें पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। इसके साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 2025 तक भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत 15 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है।

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गंगा नाथ झा परिसर के संग्रहालय की अध्यक्ष अश्विनी लंके ने बताया कि यहां पांडुलिपियों का विशाल संग्रह भी है। देश में सबसे अधिक लगभग एक लाख पांडुलिपियां संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में संरक्षित हैं। यहां 56,000 हजार प्राचीन पांडुलिपियां संरक्षित हैं।

गंगा नाथ झा परिसर में प्राचीन लिपियों का भी दिया जाता है प्रशिक्षण

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के गंगा नाथ झा परिसर में प्राचीन भारतीय लिपियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। प्रो. अपराजिता मिश्रा ने बताया कि लिपियों के अध्ययन में रुचि रखने वाले छात्रों को परिसर में तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में भोपाल, जयपुर, केरल, मुंबई, पुरी, हिमाचल प्रदेश से आए 115 छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनके अतिरिक्त संस्कृत की अन्य शाखाओं में भी लगभग 100 विद्यार्थी शोध कार्य कर रहे हैं। प्राचीन लिपियों में ब्राह्मी लिपि, ग्रंथ लिपि और शारदा लिपि को सिखाया जाता है। ऐसा करने से हम इन लिपियों में लिखे ग्रंथों का अध्ययन कर पाएंगे और प्राचीन भारतीय ज्ञान को सबके सामने ला पाएंगे।
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