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न्याय प्रणाली अब वादकारियों पर केंद्रित: जस्टिस लोकुर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 07 Aug 2016 02:17 AM IST
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हाईकोर्ट इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश और ई-कमेटी के चेयरमैन जस्टिस मदन बी लोकुर का कहना है कि डिजिटाइजेशन समय की मांग है। सुप्रीमकोर्ट की ई-कमेटी ने अब न्याय निष्पादन प्रणाली की समस्याओं का समाधान जजों के परिप्रेक्ष्य में तलाश करने के बजाय वादकारियों और वकीलों के परिप्रेक्ष्य में तलाश करने की ओर ध्यान केंद्रित किया है ताकि अपने मुकदमे से संबंधित अधिकतम जानकारियां हासिल की जा सकें। डिजिटाइजेशन, अदालतों के कंप्यूटरीकरण की दिशा में एक कदम है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, देश के अन्य उच्च न्यायालयों और सुप्रीमकोर्ट को भी ऐसे सेंटर की आवश्यकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेंटर फॉर इनफारमेंशन टेक्नालॉजी में आयोजित जजों के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि जस्टिस लोकुर ने कहा, सभी हाईकोर्ट में कुछ न कुछ ऐसे मुकदमे और दस्तावेज हैं, जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। इनको संरक्षित करने की आवश्यकता है। यह काम डिजिटाइजेशन के जरिए आसानी से हो सकता है। जस्टिस लोकुर ने ई-कोर्ट की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी। बताया, देश भर की अदालतों को कंप्यूटर तकनीक से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले ने जस्टिस लोकुर द्वारा ई-कोर्ट की दिशा में किए गए कार्यों की जानकारी को महत्वपूर्ण बताया। न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि डिजिटाइजेशन के जरिए मुकदमों की फाइलों को संभालने की समस्या से बचा जा सकता है। प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा, गूगल पर सर्च करके पता चला कि दुनिया में ऐसा डिजिटाइजेशन सेंटर कहीं और नहीं है। इसके लिए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस दिलीप गुप्ता के प्रयास उल्लेखनीय हैं। प्रदेश सरकार कंप्यूटराइजेशन की दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
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जस्टिस लोकुर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग को भी काफी महत्वपूर्ण बताया। कहा, त्रिपुरा जैसा छोटा राज्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये की बचत कर रहा है। इतना ही नहीं इस सुविधा से बंदियों की सुरक्षा और पुलिस का समय भी बचता है।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा क्रेट के जरिए जिला अदालतों के मुकदमों की हर दिन की प्रगति जानी जा सकती है। जस्टिस लोकुर ने कहा, यूपी में मुकदमों को अपडेट करने की प्रक्रिया काफी धीमी थी। इसीलिए मुख्य न्यायाधीश से बात की है। कुछ महीनों के भीतर ही अपडेटेशन का काम जहां 80 प्रतिशत पीछे था, अब मात्र 2.81 प्रतिशत ही रह गया है। मुकदमों को डिजिटाइज कर ऑन लाइन उपलब्ध कराने से वादकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री न्यायपालिका की आवश्यकताओं को लेकर काफी संजीदा हैं। उनकी ओर से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। आपराधिक न्याय प्रणाली की दिशा में कंप्यूटराइजेशन काफी महत्वपूर्ण है। सरकार ऐसी प्रणाली विकसित कर रही है जिससे सभी थानों को ऑन लाइन जोड़ा जा सके।
समारोह के दौरान डिजिटाइजेशन सेंटर पर जस्टिस लोकुर और चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले ने दो बुकलेट का विमोचन किया। बुकलेट में डिजिटाइजेशन प्रक्रिया से संबंधित जानकारियां दी गई हैं जबकि दूसरी बुकलेट सेंटर फॉर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की अत्याधुनिक बिल्डिंग पर है। डिजिटाइजेशन कमेटी के चेयरमैन जस्टिस दिलीप गुप्ता ने सेंटर से जुड़ी जानकारियां साझा की। कहा, हाईकोर्ट में फाइलों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि इसको रखने के लिए बहुत अधिक स्थान की आवश्यकता है। साथ ही फाइलों को ढूंढना भी मुश्किल होता है। इस समस्या से निपटने के लिए डिजिटाइजेशन का निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया में दो साफ्टवेयर डाक्यूमेंट ट्रैकिंग सिस्टम और डाक्यूमेंट मैनेजमेंट सेल्यूशन का प्रयोग किया जा रहा है। प्रतिवर्ष 50 करोड़ पेज डिजिटाइज करने का लक्ष्य है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेंटर फॉर इनफारमेंशन टेक्नालॉजी में आयोजित जजों के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि जस्टिस लोकुर ने कहा, सभी हाईकोर्ट में कुछ न कुछ ऐसे मुकदमे और दस्तावेज हैं, जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। इनको संरक्षित करने की आवश्यकता है। यह काम डिजिटाइजेशन के जरिए आसानी से हो सकता है। जस्टिस लोकुर ने ई-कोर्ट की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी। बताया, देश भर की अदालतों को कंप्यूटर तकनीक से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले ने जस्टिस लोकुर द्वारा ई-कोर्ट की दिशा में किए गए कार्यों की जानकारी को महत्वपूर्ण बताया। न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि डिजिटाइजेशन के जरिए मुकदमों की फाइलों को संभालने की समस्या से बचा जा सकता है। प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा, गूगल पर सर्च करके पता चला कि दुनिया में ऐसा डिजिटाइजेशन सेंटर कहीं और नहीं है। इसके लिए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस दिलीप गुप्ता के प्रयास उल्लेखनीय हैं। प्रदेश सरकार कंप्यूटराइजेशन की दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
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जस्टिस लोकुर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग को भी काफी महत्वपूर्ण बताया। कहा, त्रिपुरा जैसा छोटा राज्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये की बचत कर रहा है। इतना ही नहीं इस सुविधा से बंदियों की सुरक्षा और पुलिस का समय भी बचता है।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा क्रेट के जरिए जिला अदालतों के मुकदमों की हर दिन की प्रगति जानी जा सकती है। जस्टिस लोकुर ने कहा, यूपी में मुकदमों को अपडेट करने की प्रक्रिया काफी धीमी थी। इसीलिए मुख्य न्यायाधीश से बात की है। कुछ महीनों के भीतर ही अपडेटेशन का काम जहां 80 प्रतिशत पीछे था, अब मात्र 2.81 प्रतिशत ही रह गया है। मुकदमों को डिजिटाइज कर ऑन लाइन उपलब्ध कराने से वादकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री न्यायपालिका की आवश्यकताओं को लेकर काफी संजीदा हैं। उनकी ओर से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। आपराधिक न्याय प्रणाली की दिशा में कंप्यूटराइजेशन काफी महत्वपूर्ण है। सरकार ऐसी प्रणाली विकसित कर रही है जिससे सभी थानों को ऑन लाइन जोड़ा जा सके।
समारोह के दौरान डिजिटाइजेशन सेंटर पर जस्टिस लोकुर और चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले ने दो बुकलेट का विमोचन किया। बुकलेट में डिजिटाइजेशन प्रक्रिया से संबंधित जानकारियां दी गई हैं जबकि दूसरी बुकलेट सेंटर फॉर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की अत्याधुनिक बिल्डिंग पर है। डिजिटाइजेशन कमेटी के चेयरमैन जस्टिस दिलीप गुप्ता ने सेंटर से जुड़ी जानकारियां साझा की। कहा, हाईकोर्ट में फाइलों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि इसको रखने के लिए बहुत अधिक स्थान की आवश्यकता है। साथ ही फाइलों को ढूंढना भी मुश्किल होता है। इस समस्या से निपटने के लिए डिजिटाइजेशन का निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया में दो साफ्टवेयर डाक्यूमेंट ट्रैकिंग सिस्टम और डाक्यूमेंट मैनेजमेंट सेल्यूशन का प्रयोग किया जा रहा है। प्रतिवर्ष 50 करोड़ पेज डिजिटाइज करने का लक्ष्य है।