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Prayagraj News: प्रवक्ता की नई भर्ती में गैर बीएड अभ्यर्थियों को भी किया जाए शामिल
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राजकीय व अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती के लिए बीएड अनिवार्य कर दिए जाने से लाखों गैर बीएड अभ्यर्थी नई भर्ती से वंचित रह जाएंगे। अभ्यर्थी चाहते हैं कि नई भर्ती में गैर बीएड वालों को भी एक अवसर प्रदान किया जाए।
पूर्व में अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (टीजीटी) भर्ती के लिए बीएड व प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती के लिए परास्नातक की अर्हता लागू थी। अब राजकीय विद्यालयों के बनाई गई नियमावली को अशासकीय विद्यालयों के लिए भी लागू कर दिया गया है। ऐसे में प्रवक्ता भर्ती के लिए बीएड की डिग्री अनिवार्य हो गई है।
ऐसे लाखों अभ्यर्थी हैं, जिनके पास केवल पीजी की डिग्री है और उन्होंने बीएड नहीं किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि 105 वर्ष पुराने माध्यमिक शिक्षा परिषद अधिनियम-1921 को विलोपित कर अचानक नई नियमावली लागू कर दिए जाने से गैर बीएड अभ्यर्थी सड़क पर आ गए हैं और उनके सामने भर्ती में शामिल होने के लिए अब कोई रास्ता नहीं बचा है।
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टीजीटी की अर्हता बदलने से भी फंसा पेच
- नई नियमावली के तहत सहायक अध्यापक (टीजीटी) भर्ती के लिए चार विषयों कला, संगीत, शारीरिक शिक्षा, सिलाई में भी अर्हताओं में बदलाव किए गए से अभ्यर्थी परेशान हैं। अचानक हुए इन बदलावों से हजारों अभ्यर्थी नई भर्ती से वंचित रह जाएगी। अभ्यर्थी चाहते हैं कि उन्हें पुरानी अर्हत के तहत कम से कम एक अवसर प्रदान किया जाए, क्योंकि बदलाव अचानक किए गए हैं।
शिक्षा सेवा चयन आयोग में विरोध प्रदर्शन आज
इन तमाम बदलावों के विरोध में रविवार को प्रतियोगी छात्र मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विक्की खान के नेतृत्व में कारपेंटरी चौराहे के पास बैठक आयोजित की गई। अभ्यर्थी ने कहा कि अर्हताओं में अचानक बदलाव से जिन लाखों अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है, उन्हें नई भर्ती में शामिल होने का अवसर प्रदान किया जाएगा। निर्णय लिया गया कि इस मांग को लेकर सोमवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में प्रदर्शन किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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पूर्व में अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (टीजीटी) भर्ती के लिए बीएड व प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती के लिए परास्नातक की अर्हता लागू थी। अब राजकीय विद्यालयों के बनाई गई नियमावली को अशासकीय विद्यालयों के लिए भी लागू कर दिया गया है। ऐसे में प्रवक्ता भर्ती के लिए बीएड की डिग्री अनिवार्य हो गई है।
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ऐसे लाखों अभ्यर्थी हैं, जिनके पास केवल पीजी की डिग्री है और उन्होंने बीएड नहीं किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि 105 वर्ष पुराने माध्यमिक शिक्षा परिषद अधिनियम-1921 को विलोपित कर अचानक नई नियमावली लागू कर दिए जाने से गैर बीएड अभ्यर्थी सड़क पर आ गए हैं और उनके सामने भर्ती में शामिल होने के लिए अब कोई रास्ता नहीं बचा है।
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टीजीटी की अर्हता बदलने से भी फंसा पेच
- नई नियमावली के तहत सहायक अध्यापक (टीजीटी) भर्ती के लिए चार विषयों कला, संगीत, शारीरिक शिक्षा, सिलाई में भी अर्हताओं में बदलाव किए गए से अभ्यर्थी परेशान हैं। अचानक हुए इन बदलावों से हजारों अभ्यर्थी नई भर्ती से वंचित रह जाएगी। अभ्यर्थी चाहते हैं कि उन्हें पुरानी अर्हत के तहत कम से कम एक अवसर प्रदान किया जाए, क्योंकि बदलाव अचानक किए गए हैं।
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इन तमाम बदलावों के विरोध में रविवार को प्रतियोगी छात्र मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विक्की खान के नेतृत्व में कारपेंटरी चौराहे के पास बैठक आयोजित की गई। अभ्यर्थी ने कहा कि अर्हताओं में अचानक बदलाव से जिन लाखों अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है, उन्हें नई भर्ती में शामिल होने का अवसर प्रदान किया जाएगा। निर्णय लिया गया कि इस मांग को लेकर सोमवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में प्रदर्शन किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा।