श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद : उपासना स्थल व समयसीमा अधिनियम से वर्जित हैं वाद, खारिज योग्य
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में बुधवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी रही। इसके तहत वादों की पोषणीयता पर सवाल खड़े करने सहित दलील दी गई कि वाद, उपासना स्थल अधिनियम तथा समय सीमा अधिनियम सहित कई अन्य कानूनों के उपबंधों के अंतर्गत वर्जित हैं।
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मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में बुधवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी रही। इसके तहत वादों की पोषणीयता पर सवाल खड़े करने सहित दलील दी गई कि वाद, उपासना स्थल अधिनियम तथा समय सीमा अधिनियम सहित कई अन्य कानूनों के उपबंधों के अंतर्गत वर्जित हैं।
लिहाजा, वाद पत्रों को खारिज किया जाए। मामले में अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। श्रीकृष्ण विराजमान एट कटरा केशवदेव सहित अन्य की ओर से दाखिल 18 वादों पर न्यायमूर्ति मयंक जैन की पीठ सुनवाई कर रही है।
इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता तसनीम अहमदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपना पक्ष रखा। उन्होंने वाद पत्र संख्या सात, 12 और 18 के तथ्यों पर अपनी आपत्ति जताई। कहा, वादी की ओर से मस्जिद के अस्तित्व को 1669-70 से लेकर 1968 तक स्वीकार किया गया है। वादी को हर मामले की जानकारी पहले से है।
प्रस्तुतवाद में समझौते को चुनौती दी गई है, जो सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 के नियम तीन-ए से बधित है। इसके अलावा विशेष उपासना अधिनियम और विशेष राहत अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत बाधित हैं। मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा ने भी बहस की।
उधर, हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हरे राम त्रिपाठी आदि, सौरभ तिवारी आदि ने आपत्ति उठाई। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी न होने से कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 20 मार्च की तिथि तय कर दी।
मथुरा सहित अन्य केंद्र--कूप पूजा न रोके जाने के बारे में हाईकोर्ट से गुहार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्म भूमि व शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई के दौरान वाद संख्या 4 के वादी व्यक्तिगत आशुतोष पांडेय ने श्री कृष्ण जन्म भूमि मथुरा में शीतला अष्टमी पर की जाने वाली पारंपरिक कूप पूजा के बारे में मुस्लिम पक्ष के खिलाफ 151 सीपीसी के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
इस दौरान उन्होंने त्वरित सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि पारंपरिक कूप पूजन को जबरन रोका जा रहा है। इससे माहौल खराब होने की आशंका है। लिहाजा कूप पूजन को न रोका जाए। इस मौके पर श्री कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट के अधिवक्ता हरे राम त्रिपाठी ने भी संबंधित तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा।