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तकनीकी विशेषज्ञों ने खींचा स्मार्ट सिटी का खाका
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 15 Mar 2015 12:14 AM IST
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इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाना है तो शहर में छोटे वायरलेस सेंसर उपकरणों और विषम संवाद वस्तुओं के परीक्षण के लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचा विकसित करना होगा। कम कीमत पर सभी को इंटरनेट सुविधा भी उपलब्ध कराना होगा। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में शनिवार को शुरू दो दिनी कार्यशाला में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस आदि देश से जुटे तकनीकी विशेषज्ञों ने स्मार्ट सिटी की खूबियों और लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का खाका खींचा।
बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मौजूद डीआईजी भगवान स्वरूप ने कहा कि नागरिकों का कोई डाटाबेस तैयार नहीं होने की वजह से उनके संबंध में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस को बहुत भटकना पड़ता है। यही स्थिति भूमि विवाद के संबंध में भी है। उन्होंने विशेषज्ञों से आईटी आधारित प्रौद्योगिकी विकसित करने की अपील की। डीआईजी ने पुलिस के लिए आईटी युक्त कमांड सेंटर की भी जरूरत बताई। फ्रांस के इनरिया संस्थान की डॉ.नेथाली मिट्टो ने कहा कि 2050 तक शहरी आबादी 70 फीसदी हो जाएगी।
इस दबाव से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सूचना संचार प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान देना होगा। आईबीएम अमेरिका के प्रोफेसर विक्की हैंसन ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखकर साफ्टवेयर विकसित करने की बात कही। समन्वयक प्रोफेसर ओपी व्यास ने सभी को कम कीमत पर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की तकनीकी पर चर्चा की। उप समन्वयक प्रोफेसर सुदीप सन्याल ने विभिन्न तकनीकी उपकरणों और साफ्टवेयर का प्रदर्शन किया। निदेशक प्रोफेसर सोमनाथ विश्वास ने संस्थान की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
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बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मौजूद डीआईजी भगवान स्वरूप ने कहा कि नागरिकों का कोई डाटाबेस तैयार नहीं होने की वजह से उनके संबंध में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस को बहुत भटकना पड़ता है। यही स्थिति भूमि विवाद के संबंध में भी है। उन्होंने विशेषज्ञों से आईटी आधारित प्रौद्योगिकी विकसित करने की अपील की। डीआईजी ने पुलिस के लिए आईटी युक्त कमांड सेंटर की भी जरूरत बताई। फ्रांस के इनरिया संस्थान की डॉ.नेथाली मिट्टो ने कहा कि 2050 तक शहरी आबादी 70 फीसदी हो जाएगी।
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इस दबाव से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सूचना संचार प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान देना होगा। आईबीएम अमेरिका के प्रोफेसर विक्की हैंसन ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखकर साफ्टवेयर विकसित करने की बात कही। समन्वयक प्रोफेसर ओपी व्यास ने सभी को कम कीमत पर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की तकनीकी पर चर्चा की। उप समन्वयक प्रोफेसर सुदीप सन्याल ने विभिन्न तकनीकी उपकरणों और साफ्टवेयर का प्रदर्शन किया। निदेशक प्रोफेसर सोमनाथ विश्वास ने संस्थान की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
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